अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) मुकुल गोयल ने छेड़छाड़ पर बेतुका बयान दे डाला। उन्होंने कहा, छेड़खानी तो होती रहती हैं। हालांकि जुबान फिसलने के बाद संभले।
कहा, छेड़खानी हमेशा से होती रही हैं। पुलिस ऐसे मामलों में अब ज्यादा संवेदनशील हो रही है। शासन भी इस पर गंभीर है। उन्होंने छेड़छाड़ और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामलों को गोयल ने बेबाकी से सामाजिक समस्या बताया।
एडीजी बुधवार को पुलिस लाइन में मीडिया से मुखातिब थे। आईजी जोन आलोक शर्मा, डीआईजी के. सत्यनारायणा और एसएसपी ओंकार सिंह उनके साथ थे।
मेरठ में कम हो रहा हेल्प लाइन का प्रयोग
सवालों की चौतरफा बौछार में छेड़छाड़ के मामले रोकने के सवाल पर उन्होंने कह डाला कि छेड़खानी तो होती रहती हैं। बाद में मामले को भांपता हुए बयान को स्पष्ट किया।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश स्तर पर महिला हेल्पलाइन 1090 चलाई जा रही है, लेकिन मेरठ में इसका काफी कम प्रयोग हो रहा है। खरखौदा की युवती के धर्मांतरण के बहुचर्चित केस पर उनका कहना है कि इस मामले में युवती ने सही भी कहा और गलत भी।
लेकिन पुलिस ने सही कार्रवाई की। देश का संविधान भी अपने विवेक से फैसले लेने का हक देता है। जहां तक छेड़छाड़ और दुष्कर्म का सवाल है, तो यह बड़ी समस्या है। इस पर काबू पाने के लिए हमें सामाजिक स्तर पर भी प्रयास करने चाहिए।
पुलिस भी परफेक्ट नही
कचहरी नाले के पास दो पक्षों में मारपीट और तथाकथित छेड़छाड़ के मामले पर एडीजी से पूछा गया कि बड़ी वारदातों में पुलिस इनाम घोषित कराने में लंबा वक्त लेती है। लेकिन ऐसे छोटे मामले में क्या जल्दी थी कि बिना जांच पूरी हुए आननफानन में पांच-पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया।
जबकि गैंगरेप जैसे मामलों में आरोपी खुले घूम रहे हैं। इस पर उनका कहना था कि यह घटना आपकी नजर में छोटी हो सकती है, लेकिन दूसरे के नजर में बड़ी। हालांकि वे यह करने से भी नहीं चूके कि पुलिस भी परफेक्ट नहीं है।
चेकिंग में उत्पीड़न क्यों
पुलिस द्वारा चेकिंग के दौरान उत्पीड़न की शिकायतों पर एडीजी ने स्पष्ट कहा कि चेकिंग का मतलब कागज नहीं, बल्कि व्यक्ति को चेक करना होना चाहिए।
लोगों से अपील है कि वे इसका विरोध करें। खुद पीड़ित या जागरूक लोग यदि इससे दो-चार होते हैं तो डरें नहीं। इसका फोटो खींचे। इसे व्हाट्सएप पर मुझे, आईजी या अन्य पुलिस अफसरों को भेजें। जरूर कार्रवाई होगी।