लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल की दोनों पैथोलॉजी में लिक्विड वेस्ट ट्रीट के लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाया जा रहा है। इसमें मवाद, खून, यूरिन, केमिकल्स का जहरीला पानी छोड़ा जाएगा। इससे वह शोधित होकर संक्रमण मुक्त हो जाएगा। पहले चरण में बड़ी लैब में यह प्लांट लगना शुरू हुआ है।
बलरामपुर अस्पताल में बेड की क्षमता 780 है। अस्पताल में एसटीपी लगा होने से जहरीले पानी को शोधित कर पेड़-पौधे की सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि, लैब में ट्रीटमेंट प्लांट न लगा होने से जहरीला पानी सीधे नाली में छोड़ा जा रहा था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पर आपत्ति भी लगाई थी। इसके बाद अस्पतालों में ईटीपी प्लांट लगाने की कवायद शुरू की गई। अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु के मुताबिक पैथोलॉजी लैब में प्लांट लगाया जा रहा है। इसके बाद आरडीसी लैब में भी ये प्लांट लगेगा।
संक्रमण फैलने का खतरा होगा कम
विशेषज्ञों की मानें तो जिला अस्पताल से रोजाना बड़ी मात्रा में मवाद, खून, केमिकल्स, सर्जरी से निकलने वाली तरल गंदगी, संक्रमित पानी निकलता है जो सीवेज लाइन के जरिये नालियों में मिलता है। यह पानी संक्रमित होता है। इससे चर्म रोग, कैंसर सहित अन्य बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। अस्पताल से निकलने वाला संक्रमित लिक्विड भूजल को भी प्रभावित करता है। प्लांट लगने के बाद इसका आसानी से ट्रीटमेंट होगा और पानी का उपयोग भी हो सकेगा।