लखनऊ। हर मरीज पर एक ही दवा और एक ही खुराक का असर एक जैसा नहीं होता। इसी सोच के साथ एरा यूनिवर्सिटी में पर्सनलाइज्ड मेडिसिन को चिकित्सा के नए क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय में भारत और कैरेबियाई देशों के विशेषज्ञों ने एक दिवसीय अकादमिक कार्यक्रम में मरीज की जेनेटिक और मॉलिक्यूलर प्रोफाइल के आधार पर इलाज तय करने पर चर्चा की। इसी दौरान एरा यूनिवर्सिटी ने अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ बारबाडोस और यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्टइंडीज, बारबाडोस के साथ एमओयू भी किया।
सही समय पर सही दवा की खुराक पर जोर
एरा यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डॉ. फरजाना महदी ने बताया कि पर्सनलाइज्ड मेडिसिन का उद्देश्य मरीज की जेनेटिक और मॉलिक्यूलर प्रोफाइल के आधार पर सही समय पर सही दवा और सही खुराक उपलब्ध कराना है।
तीनों संस्थान मिलकर करेंगे काम
एमओयू पर यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्टइंडीज के प्रो वाइस चांसलर प्रो. आर. क्लाइव लैंडिस, अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ बारबाडोस की सीईओ अनीता भट्ट और एरा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. अब्बास अली महदी ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत छात्रों-शिक्षकों के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में चांसलर मीसम अली खान, एरा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जमाल मसूद समेत कई विशेषज्ञ और छात्र मौजूद रहे।