प्रदेश में एक जिला-एक उत्पाद कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए सितंबर से जिला उद्यमी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसमें कारीगरों और उद्यमियों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताने के साथ ही छोटे उद्योगों को बढ़ाने के लिए सुझाव दिए जाएंगे। सम्मेलन में बैंकों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अग्निशमन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस संबंध में निर्यात भवन में बुधवार को समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव, एमएसएमई डॉ. नवनीत सहगल ने निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रमुख सचिव ने कहा कि एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। प्रत्येक जिले के उत्पादों को बेहतर बनाने के लिए ट्रेनिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। जिलों में प्रसिद्ध दूसरे स्तर के उत्पाद को भी योजना में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने हर जिले में मेले व प्रदर्शनियों का आयोजन करने के लिए भी कहा। ओडीओपी योजना के तहत मार्जिन मनी, विपणन, कौशल विकास और टूल किट वितरण योजना के लक्ष्यों को फरवरी-2020 तक हर हाल में हासिल करना है। डॉ. शहगल ने कहा कि 2 अक्टूबर को चार हजार से अधिक कारीगरों को टूल किट और 5 हजार करोड़ रुपये के ऋण दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि अधूरे कॉमन फैसिलिटी सेंटरों(सीएफसी) को जल्द पूरा किया जाएगा। हर जिले में कम से कम एक सीएफसी की स्थापना की जाएगी। इसके लिए बेस लाइन सर्वे कर रही एजेंसी के अधिकारियों इमानदारी से सर्वे करें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश को उद्यम क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए स्टेक होल्डर्स की भी भागीदारी होनी चाहिए। छोटे उद्योगों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। विशेष सचिव एमएसएमई अमित सिंह ने कई योजनाओं की रूपरेखा सामने रखी, जिनका फायदा उद्यमी ले सकते हैं। बैठक में आयुक्त एवं निदेशक उद्योग गौरव दयाल, विशेष सचिव प्रदीप कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।