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पुलिस अफसरों के गले की फांस बनने लगी श्रवण की सुरक्षा में लापरवाही, एसएसपी से पूछताछ

Sat, 12 Aug 2017 01:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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CBI
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सआदतगंज में तेल व्यवसायी श्रवण साहू की सुरक्षा में लापरवाही पुलिस अफसरों के गले की फांस बनने लगी है।
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बेटे की हत्या की पैरवी कर रहे तेल व्यवसायी श्रवण साहू को फर्जी केस में फंसाने की साजिश नाकाम होने पर शूटरों से हत्या कराने की तफ्तीश कर रही सीबीआई ने सुरक्षा के मौखिक आदेश को लेकर तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी से तहकीकात की।

सवाल किया कि मौखिक आदेश पर असलहे के साथ पुलिसकर्मी को कैसे रवाना किया जाता है और ड्यूटी के दौरान कोई अनहोनी पर कैसे जवाबदेही तय की जाती है।

इससे पहले पुलिस लाइन के तत्कालीन रिजर्व इंस्पेक्टर के बयान दर्ज करने के साथ सीबीआई ने गनर-शैडो तैनात किए जाने का ब्यौरा तलब किया था।
  
सीबीआई द्वारा श्रवण साहू की सुरक्षा के मद्देनजर तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी को बयान के लिए तलब किए जाते ही केस से जुड़े पुलिसकर्मियों की बेचैनी बढ़ने लगी है।
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सूत्रों का कहना है कि मंजिल सैनी ने अफसरों को बताया कि श्रवण साहू द्वारा हत्या से करीब दो हफ्ते पहले अकील अंसारी व उसके गुर्गों से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अर्जी पर कार्रवाई शुरू कराने के साथ पुलिस लाइन के तत्कालीन रिजर्व इंस्पेक्टर शिशुपाल सिंह को फोन करके  श्रवण को गनर उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे।

श्रवण की अर्जी पर डिप्टी एसपी एलआईयू को रिपोर्ट तैयार करके कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करके सुरक्षा दिलाने को कहा था।

इस पर फाइल तैयार करके डीएम ऑफिस भेजी गई, लेकिन सुरक्षा मिलने से पहले श्रवण साहू की हत्या हो गई। पता चला कि रिजर्व इंस्पेक्टर ने कप्तान के आदेश के बावजूद श्रवण को गनर उपलब्ध नहीं कराया था। 

सूत्रों का कहना है कि इससे पहले तत्कालीन डिप्टी एसपी एलआईयू व रिजर्व इंस्पेक्टर के बयान दर्ज किए गए थे। रिजर्व इंस्पेक्टर ने एसएसपी द्वारा श्रवण साहू की सुरक्षा के आदेश दिए जाने से इन्कार किया था।

जानकारी दी थी कि शासन, जिला स्तरीय कमेटी या सक्षम अधिकारी के आदेश पर गनर-शैडो को रवाना किया जाता है। आदेश को बाकायदा पुलिस लाइन के रोजनामचे में दर्ज करने के साथ संबंधित पुलिसकर्मी को असलहा आवंटित करके उसका नंबर व ब्यौरा दर्ज करने के बाद ड्यूटी पर भेजा जाता है।

दरअसल, कोई व्यक्ति जानमाल के खतरे पर ही गनर-शैडो की मांग करता है और किसी भी समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है। सक्षम अधिकारी के आदेश के बगैर सशस्त्र पुलिसकर्मी को रवाना करने पर कोई हादसा या हमला होने पर जवाबदेही तय नहीं हो सकती।

कई चक्कर काटे, पर नहीं मिली सुरक्षा 

श्रवण साहू की हत्या से सहमे परिवारीजनों का कहना है कि अकील अंसारी की साजिश उजागर होने पर श्रवण ने 19 जनवरी 2017 को एसएसपी को अर्जी देकर सुरक्षा की मांग की थी। उन्होंने आश्वासन दिया। गनर न उपलब्ध होने पर श्रवण ने एसएसपी कैंप ऑफिस के कई चक्कर लगाए, फोन किए। कोई नतीजा न निकलने पर खुद चौकसी के साथ कारोबार में जुट गए थे और अकील ने जेल में साजिश रचकर एक फरवरी को उनकी हत्या करा दी। 
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अकील के गुर्गों का खौफ 

डीजीपी के आदेश पर श्रवण साहू के परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस की गारद तैनात है। इसके बावजूद श्रवण के भाई, पत्नी, बेटी-बेटे को अकील के गुर्गों का खौफ है। उनका कहना है कि अकील ने जेल से ही श्रवण की हत्या कराई। उसके इशारे पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों ने श्रवण को फंसाने की साजिश की थी। अकील को दूरस्थ जिले की जेल में स्थानांतरित करके उसका नेटवर्क तोड़ा जा सकता है।  
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