लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को शोध, रोजगार और इंटर्नशिप के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इसके लिए विवि प्रशासन ने सोमवार को जैव चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (सीबीएमआर) व स्टेट ड्रग मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (एसडीएमए) से अलग-अलग एमओयू किया। जो विद्यार्थियों के लिए काफी फायदेमंद होगा।
विवि के मंथन सभागार में सीबीएमआर व इंस्टीट्यूट आफॅ फामार्स्युटिकल सांइसेज के बीच औषधि अनुसंधान विकास के सहयोग के लिए एमओयू किया गया।
जिस पर कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय व प्रो. आलोक कुमार धवन निदेशक सीबीएमआर, प्रो. पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी निदेशक इंस्टीट्यूट आफॅ फामार्स्युटिकल सांइसेज ने हस्ताक्षर किया।
इस एमओयू के अनुसार कोविड-19 जैसी महामारी पर जैव चिकित्सा अनुसंधान के लिए संयुक्त शोध प्रोजेक्ट, औषधि विज्ञान के क्षेत्र में एकेडमिक पब्लिकेशन, छात्रों व शिक्षकों के लिए न्यू एजुकेशन पालिसी के अनुसार शोध के अवसर, एडवांस इंक्यूबेशन के साथ प्रशिक्षण प्रोग्राम व इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा।
इस अवसर पर प्रो. आलोक धवन ने बताया कि सीबीएमआर देश का इकलौता जैव चिकित्सीय अनुसंधान संस्थान है जो कि जैव चिकित्सीय अनुसंधान के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं हैं।
इस एमओयू से प्रदेश में साइंस एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा मिलेगा व विद्यार्थियों के लिए नए दरवाजे खुलेंगे। इस अवसर पर डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. पूनम टंडन, प्रो. राकेश चंद्रा डीन एकेडमिक उपस्थित थे।
दूसरी तरफ विवि के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल सांइसेज ने सोमवार को ही स्टेट ड्रग मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के साथ भी एमओयू किया। जो फार्मेसी के विद्यार्थियों को औषधि अनुसंधान विकास व छात्रों के तकनीकी प्रशिक्षण, रोजगार में सहयोग करेगा। एमओयू पर कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय व वीर अंजनी कुमार सक्सेना, प्रो. पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी ने हस्ताक्षर किया।
इस एमओयू के अनुसार छात्रों को औद्योगिक तकनीकी प्रशिक्षण व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएंगे। शिक्षकों के सहयोग से फार्मास्यिूटिकल औद्योगिक शोध व समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। संकाय सदस्यों के विकास के लिए एकेडमिक इंडस्ट्रियल औषधि अनुसंधान करेंगे व प्रदेश में फार्मास्यिूटिकल उद्योग का विकास भी होगा।
वीर अंजनी कुमार सक्सेना ने बताया कि प्रदेश में 515 औषधि व कास्मेटिक्स निर्माण औद्योगिक इकाईयां स्थापित हैं। प्रदेश में 40 हजार करोड़ का फार्मा व्यवसाय है, जिसमें प्रदेश की फार्मा कंपनियों का 1000 करोड़ का ही योगदान है।
39 हजार करोड़ के गैप को पूरा करने के लिए फार्मास्यिूटिकल कंपनी को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा व अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इससे लखनऊ विवि से पास होने वाले सभी छात्रों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस अवसर पर रविंद्र सिंह लघु भारतीय उद्योग भी उपस्थित रहें।