लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार गांवों और किसानों को भरपूर बिजली देने की तैयारी में जुट गई है।
गांवों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए 1000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने के लिए टेंडर मांगे गए हैं। 19 दिसंबर को टेंडर फाइनल करके बिजली खरीदने संबंधी आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
24 दिसंबर से गांवों की आपूर्ति 10 से बढ़ाकर 12 घंटे करने की योजना है जबकि 26 जनवरी के बाद इसे 14 घंटे करने की तैयारी है। पावर कार्पोरेशन की कोशिश है कि 15 मई तक ग्रामीण इलाकों में बिजली की कोई किल्लत न रहे।
लोकसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ ही सरकार को गांवों और किसानों की फिक्र सताने लगी है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऊर्जा एवं पावर कार्पोरेशन के आला अधिकारियों से साफ कह दिया है कि जैसे भी हो गांवों को 12 से 14 घंटे बिजली की व्यवस्था की जाए।
सरकार को डर है कि कहीं चुनाव में करंट न लग जाए इसलिए गांवों को ज्यादा से ज्यादा आपूर्ति के लिए पावर कार्पोरेशन पर दबाव बनाया जा रहा है।
पार्टी के मंत्रियों, विधायकों, नेताओं व कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के बाद मुख्यमंत्री खुद बिजली को लेकर लगातार शासन और कार्पोरेशन के अफसरों से बातचीत करके आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर लाने की मुहिम में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री के फरमान के बाद ही अतिरिक्त बिजली खरीदने का फैसला किया गया है जिससे गांवों व किसानों तो ज्यादा बिजली दी ही जा सके शहरों की आपूर्ति व्यवस्था में भी कुछ सुधार हो सके।
रबी की बुआई के लिए हाल ही में किसानों को पांच घंटे दिन तथा पांच घंटे रात में बिजली आपूर्ति का शिड्यूल जारी किया गया है।
अब आपूर्ति शिड्यूल में बढ़ोतरी को लेकर माथापच्ची चल रही है। पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने तय किया है कि 24 दिसंबर से गांवों को 12 घंटे बिजली दी जाएगी।
यह शिड्यूल 26 जनवरी तक लागू रहेगा। इसके बाद 14 घंटे का शिड्यूल लागू करने की तैयारी है जो 15 मई यानी चुनाव होने तक लागू रहेगा।
सारी कवायद चुनावी फायदे के लिए चल रही है। 31 अगस्त 2014 तक 1000 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए टेंडर भी मांग लिए गए हैं।
ये टेंडर शुक्रवार को खुलने थे लेकिन अब इसे 19 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा ट्रेडिंग कंपनियां या बिजली उत्पादक कंपनियां इसमें हिस्सा ले सकें।
पावर कार्पोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की आपूर्ति बढ़ाने की सारी तैयारियां कर ली गई हैं।