प्रदेश में बिजली की मौजूदा दरों में तीन रुपये प्रति यूनिट तक की कमी की जा सकती है। यह मानना है राज्य विद्युत नियामक आयोग का।
आयोग के मुताबिक, लाइन हानियों में कमी करके तथा बिजलीघरों का उत्पादन बढ़ाकर बिजली दरें घटाई जा सकती हैं।
इसके लिए आयोग ने माथापच्ची भी शुरू कर दी है। दोनों ही मोर्चों पर बिजली निगमों के लिए बाकायदा लक्ष्य निर्धारित कर उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल शुरू की जा रही है।
आयोग 2014-15 के टैरिफ ऑर्डर से इसकी शुरुआत कर सकता है।
इस तरह मिल सकती है राहत
इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में अनमीटर्ड उपभोक्ताओं को मीटर लगवाने के बाद उनके लिए बिजली दरें बढ़ाने के बजाय कम करने पर विचार किया जा रहा है।
आयोग के तय मानकों को पूरा करने में अगर विद्युत वितरण कंपनियां और राज्य विद्युत उत्पादन निगम सफल रहते हैं तो उपभोक्ताओं को काफी राहत मिल सकती है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन देश दीपक वर्मा का कहना है कि आयोग लाइन हानि और बिजली घरों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर संबंधित बिजली निगमों के लिए दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
आयोग की पूरी कोशिश होगी कि बिजली निगम निर्धारित लक्ष्य हासिल करें जिससे दरें बहुत ज्यादा बढ़ाने की जरूरत ही न पड़े।
टैरिफ ऑर्डर में शामिल होंगे अहम बिंदु
देश दीपक वर्मा का कहना है कि आगामी टैरिफ ऑर्डर में इस संबंध में कुछ अहम बिंदु शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
लाइन हानि: 5 फीसदी कम हो तो बच सकते हैं 2450 करोड़ रुपये
40.3 फीसदी प्रदेश में26.3 फीसदी है राष्ट्रीय औसत1 फीसदी लाइन हानि कम कर लें तो बचाए जा सकते हैं 490 करोड़ रुपये5 फीसदी कम करने पर 2450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व
फायदा: इसका सीधा फायदा बिजली दरों में कमी के रूप में मिल सकता है
ऐसे हो सकता है दो हजार करोड़ का लाभ
उत्पादन क्षमता बढ़े तो दो हजार करोड़ का लाभ
60 फीसदी है बिजलीघरों का प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) यूपी में90 फीसदी है राष्ट्रीय औसत25 फीसदी उत्पादन क्षमता बढ़ जाए सूबे में तो 2000 करोड़ रुपये का होगा फायदा
यानीः बिजली की उत्पादन लागत कम होगी तो उपभोक्ताओं पर कम पड़ेगा बोझ।
बिजली की मौजूदा दरों में कमी की काफी गुंजाइश है बशर्ते बिजली निगम अपनी परफॉरमेंस में सुधार लाकर निर्धारित लक्ष्य हासिल करें। -देश दीपक वर्मा, चेयरमैन, राज्य विद्युत नियामक आयोग