आयोग ने बिजली कंपनियों के सीएजी ऑडिट के अलावा रेगुलेटरी सरचार्ज के मद में उपभोक्ताओं से वसूल की गई धनराशि, उदय व पावर फॉर ऑल से बिजली कंपनियों को हुए फायदे का भी ब्योरा मांगा है।
2017-18 के टैरिफ ऑर्डर के साथ तय किए गए परफॉर्मेंस पैरामीटर पर अमल का भी ब्योरा मांगा गया है। उदय के तहत प्रदेश में लाइन हानियां कम करके 15 प्रतिशत तक लाने और राजस्व वसूली 90 फीसदी से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन दोनों ही मोर्चों पर बिजली कंपनियां पीछे हैं। आयोग के सूत्रों का कहना है कि बिजली कंपनियों से सूचनाएं मिलते ही दरों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
केंद्र सरकार की उदय योजना के तहत हर साल बिजली दरों में औसतन 8.6 फीसदी की वृद्धि प्रस्तावित की गई है। चूंकि पिछले साल बिजली दरों में करीब 13 फीसदी की वृद्धि की जा चुकी है, इसलिए आयोग इस साल उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। अलबत्ता बिजली इकाइयों की उत्पादन लागत में कमी का फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय बिजली कंपनियों की ओर से आमदनी और खर्च के आंकड़े दाखिल करने के बाद ही होगा।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि अगर बिजली कंपनियां वास्तविक आंकड़े पेश करती हैं तो दरों में कमी होनी तय है। अगर कंपनियां दरें बढ़वाने के लिए मनगढ़ंत आंकड़े दाखिल करती हैं तो परिषद इसका विरोध करेगी।