पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को निजी हाथों में देने को लेकर निरंतर विरोध जारी है। ऊर्जा संगठनों ने मंगलवार को विभिन्न कार्यों और परियोजनाओं पर जनसभा कर विरोध जताया। आगरा में हुई बिजली पंचायत में उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को निजीकरण से होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ दक्षिणांचल के एमडी कार्यालय परिसर में मंगलवार को बिजली पंचायत की। इसमें कर्मचारियों ने निजीकरण और आगरा में टोरंट पावर के फ्रेंचाइजी करार को रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया गया। निजीकरण को कर्मचारियों ने घोटाला बताया और कहा कि सीएजी से ऑडिट कराकर संपत्तियों की कीमत तय की जाए। पंचायत में पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन पर आरोप लगाया गया कि औद्योगिक घरानों को 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां सौंपी जा रही हैं।
पंचायत में बिजली कर्मचारियों के साथ किसान और शहर के लोगों को भी बुलाया गया। समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ आगरा में टोरंट पावर के साथ फ्रेंचाइजी करार रद्द करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्व सम्मति से मंजूर कर लिया गया। यह प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा गया।