बिजली कंपनियों का जवाब दाखिल होते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद भी बिजली दरों में कमी कराने के लिए सक्रिय हो गया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी. सिंह तथा सदस्य कौशल किशोर शर्मा व वीके श्रीवास्तव से मिलकर लोक महत्व प्रस्ताव सौंपते हुए कहा कि जब बिजली कंपनियों ने टैरिफ प्रस्ताव दाखिल नहीं किया तो कंपनियों पर उपभोक्ताओं के निकल रहे 20596 करोड़ रुपये के एवज में दरों में कमी के लिए स्वत: संज्ञान कार्रवाई शुरू की जाए।
उनका कहना है कि जब बिजली दरों में कमी की बात आती है तो पावर कॉर्पोरेशन हाथ खडे़ करके पूरा मामला नियामक आयोग पर डाल देता है। ऐसे में नियामक आयोग को जिम्मेदारी निभाते हुए इस शर्त के साथ एआरआर स्वीकार करना चाहिए कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के निकल रहे 20596 करोड़ रुपये का विज्ञापन प्रकाशित कराकर उस पर आम उपभोक्ताओं से राय ली जाए।
कंपनियों को पता है कि कानूनन जब उपभोक्ताओं का पैसा निकल रहा है तो दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दाखिल नहीं किया जा सकता। मामले को उलझाने के लिए इस मामले पर चुप्पी साधकर गेंद आयोग के पाले में डाल दी गई है।