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...तो अब इतनी महंगी हो जाएगी घरेलू बिजली!

Sun, 08 Jun 2014 09:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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रेगुलेटरी सरचार्ज का बोझ बिजली उपभोक्ताओं पर डालने के बाद अब बिजली कंपनियों ने टैरिफ भी बढ़ाने की तैयारी कर ली है।
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बिजली कंपनियों ने औसत 9 से 12 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। इनमें सबसे ज्यादा मार घरेलू बिजली उपभोक्ताओं पर लगने वाली है।

घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली 30 से 35 फीसदी तक महंगी करने का प्रस्ताव है। नई बिजली दरें अगस्त से लागू हो सकती हैं।

नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) की याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। इसमें चालू वित्तीय वर्ष का टैरिफ प्रस्ताव भी शामिल है।

रेग्युलेटरी सरचार्ज भी देना होगा आपको

इन कंपनियों के एआरआर की सार्वजनिक सूचना भी जारी कर दी गई है। आयोग ने भी इसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है।

अब इस पर नियामक आयोग सुनवाई करेगा। इस प्रक्रिया में करीब दो महीने का समय लगेगा। इसके बाद नई दरें प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगी। दरें बढ़ने के बाद उपभोक्ताओं पर दोहरी मार लगेगी।

एक तरफ बिजली का बिल बढ़ेगा जबकि दूसरी ओर कुल बिल पर 2.84 फीसदी के हिसाब से रेग्युलेटरी सरचार्ज भी उपभोक्ताओं को देना होगा।

100 यूनिट ही मिलेगी 4 रुपये की दर से

बिजली कंपनियों ने जो एआरआर दाखिल किया है उसके मुताबिक इस श्रेणी के उपभोक्ताओं के यूनिट स्लैब को कंपनियों ने घटाकर घटाकर आधा करने का प्रस्ताव दिया है।

अभी तक 200 यूनिट तक चार रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलने वाली बिजली नई प्रस्तावित दरों में इसे घटाकर मात्र 100 यूनिट कर दिया गया है।

कॉमर्शियल उपभोक्ताओं के भी यूनिट स्लैब को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव दिया है। इससे इनकी बिजली भी महंगी हो जाएगी।
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चुनाव से पहले सरकार नहीं उठा सकती थी जोखिम

चुनाव से पहले टैरिफ बढ़ाने का जोखिम सरकार नहीं उठाना चाहती थी। यही कारण है कि 29 नवंबर 2013 को एआरआर दाखिल करने के बाद भी जरूरी सूचनाएं देने में बिजली कंपनियों ने देरी की।

एआरआर को नियामक आयोग ने अपने कंसल्टेंट से परीक्षण कराया। इसके बाद बिजली कंपनियों की परफॉर्मेंस व रेवेन्यू से जुड़ी कई तरह की सूचनाएं नियामक आयोग ने मांगी।

इन सूचनाओं को जानबूझकर विलंब से दिया गया ताकि प्रक्रिया चुनाव के बाद ही पूरी हो सके। इसके बाद आचार संहिता लग गई।
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