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ऊसर-बंजर जमीन पर लहलहाएगी बिजली की फसल : अनुपयोगी भूमि पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर होंगे मालामाल

Fri, 23 Jul 2021 07:49 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

प्रदेश में ऊसर-बंजर जमीन पर किसान अब बिजली की भी खेती लहलहाएंगे। किसानों की जिस जमीन पर तिनका तक नहीं उगता वह भी किसानों को मालामाल करेगी। इसका जरिया बनेगी सौर ऊर्जा।
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सौर ऊर्जा - फोटो : डेमो पिक
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विस्तार
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प्रदेश में ऊसर-बंजर जमीन पर किसान अब बिजली की भी खेती लहलहाएंगे। किसानों की जिस जमीन पर तिनका तक नहीं उगता वह भी किसानों को मालामाल करेगी। इसका जरिया बनेगी सौर ऊर्जा। केंद्र सरकार की कुसुम योजना से ये मुमकिन हो सकेगा। कुसुम योजना के तहत प्रदेश के  चार विद्युत वितरण निगमों में इसके लिए उपकेंद्रों का चयन भी हो गया है।

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केंद्र की मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। योगी सरकार भी इस मुहिम में जुटी है। कुसुम योजना को लेकर योगी सरकार बेहद संजीदा हैं। इसके तहत 24 उपकेंद्रों का चयन किया गया है। राज्य विद्युत नियामक आयोग के अनुमोदन के बाद 106 मेगावाट क्षमता की सोलर परियोजनाओं की स्थापना के लिए बिड (टेंडर) भी हो चुकी है। योजना के तहत किसान 0.5 से लेकर दो मेगावाट तक सौर पावर परियोजनाओं की स्थापना कर सकेंगे।

सब स्टेशन के 5 किमी के दायरे में हो भूमि
योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी भूमि विद्युत सब स्टेशन से पांच किमी के दायरे में होगी। किसान खुद अपनी जमीन अथवा विकासकर्ता को लीज पर देकर परियोजना लगा सकते हैं। इसके साथ दो शर्तें भी जुड़ी हैं। मसलन जमीन बंजर या अनुपयोगी हो।
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3.70 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी बिजली
सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाले किसानों से पावर कार्पोरेशन 3.70 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदेगी। इसके लिए 25 साल का अनुबंध किया जाएगा। प्लांट से उत्पादित बिजली का जितना इस्तेमाल किसान करेंगे उसे छोड़कर बाकी बिजली कार्पोरेशन खरीद लेगा। ऊर्जा विभाग का यह भी प्रस्ताव है कि अगर किसान किसी विकासकर्ता को जमीन देता है तो विकासकर्ता को मिलने वाले प्रति यूनिट टैरिफ  में से किसान को 5 से 10 प्रतिशत का भुगतान करना होगा।

पश्चिमांचल के चार जिले योजना में शामिल
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में कुसुम योजना ए के तहत सहारनपुर के  उपकेंद्रों फतेहपुर और अम्हेटा पीर का चयन हुआ है। यहां पर दो मेगावाट की 30 सौर परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। वहीं मुरादाबाद के अफजलगढ़, हजरत नगर गढ़ी और भीकनपुर सब स्टेशन का चयन हुआ है। अफजलगढ़ में दो मेगावाट की 10, हजरतनगर गढ़ी में दो मेगावट की 10 और भीकनपुर में एक मेगावाट की 10 और दो मेगावाट की पांच परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।

पूर्वांचल के दो व मध्यांचल व दक्षिणांचल के तीन-तीन जिलों का चयन
इसी तरह पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के दो जिलों गोरखपुर और वाराणसी का चयन हुआ है। वाराणसी के चकिया सब स्टेशन में दो मेगावाट की पांच तथा नवादा सब स्टेशन में एक मेगावाट की 10 परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। जबकि गोरखपुर के गजाई कोल सब स्टेशन में दो मेगावाट की पांच परियोजनाएं स्थापित होंगी। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत तीन जिलों का चयन हुआ है। जिसमें हरदोई जिले के सरवा सब स्टेशन में एक मेगावाट की पांच परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। वहीं बदायूं जिले के इस्लामनगर में दो मेगावाट की पांच परियोजनाएं स्थापित होंगी। जबकि बाराबंकी जिले के कोटवा धाम में दो मेगावाट की पांच परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।

दक्षिणांचल के तीन जिलों में लगेंगी परियोजनाएं
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में आगरा के फतेहाबाद और कागरौल सब स्टेशन का चयन हुआ है जहां क्त्रस्मश: दो मेगावाट के 10 और दो मेगावाट की 8 परियोजनाएं स्थापित होंगी। महोबा के महोबाकंठ सब स्टेशन में दो मेगावाट की 5 परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। वहीं बांदा के बगेरू सबस्टेशन में एक मेगावाट की 8 और दो मेगावाट की पांच परियोजनाएं लगाई जाएंगी। जबकि पैलानी सब स्टेशन में एक मेगावाट की पांच परियोजनाएं लगेंगी।

झांसी जनपद के गुरुसराय सब स्टेशन में दो मेगावाट की 10 परियोजनाएं लगाई जाएंगी। जबकि बामौर सब स्टेशन में दो मेगावाट की पांच और एक मेगावाट की पांच परियोजनाएं स्थापित होंगी। उरई के नियामदपुर सब स्टेशन में एक मेगावाट की पांच और दो मेगावाट की पांच परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। जबकि नवीगांव सब स्टेशन में एक मेगावाट की 10 परियोजनाएं स्थापित होंगी।

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