लखनऊ। नई दिल्ली के विवेक विहार इलाके में रविवार तड़के शॉर्ट सर्किट से एक चार मंजिला मकान में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई। देश को झकझोरने वाली इस घटना ने ये सोचने के लिए मजबूर किया है कि लोग शॉर्ट सर्किट जैसी स्थिति से बचने के लिए कितने सजग हैं। यह विषय इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि सोमवार को विश्व अग्निशमन दिवस है। संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं।
अग्निशमन विभाग के अनुसार, आग की 10 में से नौ घटनाओं की वजह शॉर्ट सर्किट होती है। इसके बावजूद लोग बिजली विभाग से सुरक्षा ऑडिट नहीं कराते। ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं कि वह बिजली संबंधी सुरक्षा ऑडिट भी करा सकते हैं। आग लगने के मामलों में अग्निशमन कर्मी जान पर खेलकर जानमाल की रक्षा करते हैं। इन कर्मियों के साहस और समर्पण को सलाम करने के लिए हर वर्ष चार मई को विश्व अग्निशमन दिवस मनाया जाता है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) अंकुश कुमार मित्तल ने बताया कि शहर में ऐसे बहुत से अपार्टमेंट हैं जो दशकों पुराने हैं। इन अपार्टमेंट की संख्या पुराने लखनऊ में अधिक है। इनमें निर्माण के समय हुई वायरिंग अभी तक चल रही है मगर लोड साल दर साल बढ़ता जा रहा है। ओवरलोडिंग और विद्युत उपकरणों का गलत इस्तेमाल शॉर्ट सर्किट का मुख्य कारण बनता है। खतरा होने के बावजूद अपार्टमेंट के अनुरक्षण (मेंटेनेंस) प्रभारी बिजली विभाग से ऑडिट नहीं कराते। अगर शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग पर प्रभावी रोकथाम चाहिए तो पांच वर्ष के अंतराल पर बिजली वायरिंग का अनिवार्य रूप से ऑडिट कराना चाहिए। इस दौरान वायरिंग खराब मिलने पर उसे तुरंत बदलना चाहिए। (संवाद)
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भवनों को ऊंचाई के मानक के अनुसार तीन से पांच वर्ष तक के लिए अग्निशमन की एनओसी दी जाती है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ पुराने अपार्टमेंट को बिजली सुरक्षा ऑडिट की जरूरत है। कायदे से शहर के सभी छोटे-बड़े घरों को यह ऑडिट करानी चाहिए। ऊंचे भवनों में सुरक्षा ऑडिट पर जोर इसलिए दिया जाता है क्योंकि आग लगने की दशा में ऐसे भवनों रेस्क्यू में समय लगता है। चुनौतियां भी ज्यादा होती हैं।
-अंकुश कुमार मित्तल,
मुख्य अग्निशमन अधिकारी
खिड़कियों की ग्रिल बनती है बाधा
एफएसओ हजरतगंज राम कुमार रावत ने बताया कि आग लगने पर सबसे बड़ी बाधा होती है संबंधित तल या फ्लैट तक पहुंचने की। अगर पहुंच भी गए तो बालकनी में लगी लोहे की ग्रिल के कारण फ्लैट के अंदर पहुंचना मुश्किल हो जाता है। खिड़कियां या बालकनी बंद रहने से आग की दशा में धुआं निकल नहीं पाता। दमकल कर्मियों को सबसे अधिक धुएं का ही सामना करना पड़ता है।
आग से ज्यादा प्राणघातक है धुआं
एफएसओ आलमबाग धर्मपाल सिंह बताते हैं कि हादसा होने पर आग से अधिक धुआं प्राणघातक बन जाता है। इससे लोग जल्दी बेहोश हो जाते हैं और भाग भी नहीं पाते। जो होश में रहते हैं वह धुएं में रास्ता न दिखने से बाहर नहीं निकल पाते। इसलिए अपार्टमेंट, प्रतिष्ठान और घरों में वेंटिलेशन का ध्यान रखना सबसे जरूरी होता है।
इन बातों को रखें ध्यान
घर में स्वीकृत विद्युत लोड के अनुसार ही उपकरण इस्तेमाल करें।
एमसीबी और स्टेबलाइजर के साथ ही एसी का इस्तेमाल करें।
घर में कहीं भी खुली वायरिंग है तो उसे तत्काल दुरुस्त कराएं।
ज्यादा बिजली खाने वाले उपकरणों के लिए ज्यादा एम्पीयर के प्लग व सॉकेट का उपयोग करें।
घर में वायरिंग पुरानी है तो उसकी जांच कराएं और एमसीबी लगवाएं।
(जैसा बिजली निगम के अभियंताओं ने बताया)
बिजली ऑडिट के लिए ये है प्रक्रिया
विद्युत ऑडिट के लिए आवेदक को विद्युत सुरक्षा निदेशालय में संपर्क कर चालान के जरिये शुल्क बैंक में जमा करना पड़ता है।
शुरुआती एक किलोवाट के लिए 200 रुपये ऑडिट शुल्क निर्धारित है। इसके बाद प्रतिकिलो वाट 50 रुपये की दर से वृद्धि होती है।
आवेदन एवं शुल्क जमा करने के बाद तय तिथि पर विभाग के लोग ऑडिट करते हैं।
ऑडिट में यदि कोई खामी नहीं मिलती है तो विभाग एनओसी जारी कर देता है।
अपार्टमेंट और व्यावसायिक भवनों के लिए ऑडिट कराना और एनओसी लेना अनिवार्य है।
छोटे मकान एवं बिजली के घरेलू कनेक्शन के मामलों में यह व्यक्ति की इच्छा पर है कि वह ऑडिट कराना चाहता है या नहीं।
इन बातों का रखें ध्यान
- 15 से 45 मीटर की ऊंचाई वाले भवन में बड़े वाटर टैंक, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट और फायर एक्सटिंग्विशर की व्यवस्था जरूर हो।
- प्रत्येक अपार्टमेंट और ऊंचे भवन में आपातकालीन मार्ग भी हो।
- स्मोक प्रेशर सिस्टम और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था हो।
- कॉलोनियों और अपार्टमेंट के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थायी बैरियर न लगे हों।
- मुख्य गेट पर कोई अतिक्रमण भी न हो।
दमकल विभाग के पास संसाधन
- 24 दमकल के बड़े वाहन
- 22 हजार लीटर पानी की क्षमता की एक गाड़ी
- 2 हाइड्रोलिक प्लेटफाॅर्म।
- 7 छोटे वाहन।
- 1 मल्टी डिजास्टर रिस्पांस व्हीकल।
- 45 मीटर तक कैमरा तकनीक से आग बुझाने में सक्षम एक वाहन।
आग बुझाने के लिए ये हैं प्रबंध
- सूचना मिलते ही संबंधित फायर स्टेशन से 52 सेकंड में वाहन हो जाते हैं रवाना।
- पूरे शहर में नौ फायर स्टेशन हैं। तीन और फायर स्टेशनों की स्थापना प्रस्तावित।
- मुख्य अग्निशमन अधिकारी के अलावा राजधानी में कुल 216 दमकल कर्मी।
- तीन फायर स्टेशन में इंस्पेक्टर रैंक के एफएसओ। अन्य पर एसआई रैंक के अधिकारी।
लखनऊ में आग की कुछ प्रमुख घटनाएं
इस वर्ष एक से 30 अप्रैल के बीच 567 स्थानों पर आग की घटनाएं हुईं।
इसमें 15 बड़ी घटनाएं थीं जिसमें दमकल की कई इकाइयों को लगना पड़ा था।
15 अप्रैल 2026 : विकासनगर में शॉर्ट सर्किट से 1200 झोपड़ियों में आग से दो बच्चों की मौत।
03 मई 2025 : सरोजनीनगर में अमौसी स्टेशन रोड स्थित फूड फैक्टरी में आग से मालिक और एक कर्मचारी की मौत।
27 अप्रैल 2025 : कपूरथला में बिल्डिंग में आग बुझाते समय छज्जा गिरने से छह दमकल कर्मी घायल।
14 अप्रैल 2025 : लोकबंधु अस्पताल में आग से एक मरीज की मौत।
5 सितंबर 2022 : हजरतगंज स्थित होटल लेवाना में आग लगी। चार लोगों की मौत।
19 जून 2018 : चारबाग स्थित एसएसजे इंटरनेशनल और विराट होटल में आग लगी। पांच से अधिक लोगों की मौत।
इसलिए मनाया जाता है विश्व अग्निशमन दिवस
चार मई 1999 को ऑस्ट्रेलिया में जंगल की आग पर काबू पाते समय पांच दमकलकर्मियों की मौत हो गई थी। इनकी याद में यह दिवस मनाया जाता है।