प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अप्रैल के बिजली बिल में अब 3.71 फीसदी रेग्युलेटरी सरचार्ज नहीं लगेगा।
पावर कार्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) संजय सिंह की ओर से सभी विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को पत्र भेजकर साफ किया गया है कि 31 मार्च 2014 के बाद रेग्युलेटरी सरचार्ज लागू नहीं होगा।
गौरतलब है कि राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से पिछले साल मई में जारी वर्ष 2013-14 के टैरिफ ऑर्डर में कॉर्पोरेशन को 2000-2001 से 2007-08 के बीच अनुमानित और वास्तविक राजस्व व्यय के अंतर लगभग 2400 करोड़ की भरपाई के लिए 31 मार्च 2014 तक 3.71 फीसदी रेग्युलेटरी सरचार्ज वसूलने की अनुमति दी थी।
यह अवधि खत्म होने के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने रेग्युलेटरी सरचार्ज को आगे जारी रखने के लिए विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका दायर की थी।
वहीं, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जनहित प्रत्यावेदन दाखिल करके याचिका खारिज करने की मांग की थी।
लोकसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को लेकर किसी तरह का विवाद न खड़ा हो जाए, इसके मद्देनजर आयोग ने इस पर कोई फैसला नहीं किया।
दरअसल, 31 मार्च को इसकी वैधता समाप्त हो जाने की वजह से पावर कॉर्पोरेशन को हर महीने लगभग 100 करोड़ रुपये के राजस्व से हाथ धोना पड़ेगा, इसलिए उसकी कोशिश थी कि नया टैरिफ ऑर्डर जारी होने तक इसकी मियाद बढ़ा दी जाए।
चुनाव आचार संहिता के चलते नियामक आयोग बिजली दरों के निर्धारण की औपचारिकता तक पूरी करने से बच रहा है। ऐसे में रेग्युलेटरी सरचार्ज जारी रखने के मामले पर भी उसने चुप्पी साध ली।
आयोग के रुख देखते हुए कॉर्पोरेशन ने अपने नियंत्रण वाली सभी बिजली कंपनियों को पत्र भेजकर 31 मार्च 2014 के बाद के बिजली बिलों पर रेग्युलेटरी सरचार्ज न लगाने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि इस बीच कुछ बिलिंग एजेंसियों ने अप्रैल के बिलों में भी सरचार्ज जोड़ना शुरू कर दिया।
निदेशक (वाणिज्य) ने इसे टैरिफ ऑर्डर के विरुद्ध बताते हुए सॉफ्टवेयर में बदलाव करके रेग्युलेटरी सरचार्ज हटाने को कहा है।