घरों में शोरूम खोला, अवैध निर्माण किया तो बिजली भी कटेगी
एलडीए अब पुलिस के साथ लेसा को भी भेजेगा कार्रवाई की सूचना
लेसा को बिजली कनेक्शन नहीं देने और पूर्व में दिया कनेक्शन काटने का देगा पत्र
घरों में शोरूम खोलने, अन्य व्यावसायिक उपयोग समेत अवैध निर्माण करने पर अब बिल्डिंग सील करने या तोड़ने की कार्रवाई के साथ बिजली भी कटेगी। एलडीए अब अवैध निर्माणों पर लेसा को बिजली कनेक्शन नहीं देने के लिए पत्र भेजेगा। एलडीए अपनी कार्रवाई के तुरंत बाद पुलिस की तरह ही लेसा को भी पत्र भेजकर सूचित करेगा।
वीसी प्रभु एन सिंह ने शुक्रवार को प्रवर्तन कार्यों की समीक्षा के बाद इसका आदेश जारी कर दिया है। वीसी ने बताया कि अवैध निर्माण और आवासीय में व्यावसायिक उपयोग को सभी विभागों के साथ संयुक्त कार्रवाई कर ही रोका जा सकता है। इसके लिए एलडीए अब लेसा का भी सहयोग ले रहा है। सभी विहित प्राधिकारी और अधिशासी अभियंताओं को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया गया है। इस पत्र का प्रारूप भी एलडीए वीसी ने फाइनल कर दिया है।
लेसा की भी एलडीए जितनी ही जिम्मेदारी
एलडीए वीसी का कहना है कि जिस तरह विकास प्राधिकरण को लागू महायोजना-2031 के अनुरूप विकास और भू-उपयोग यूपी नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 में सुनिश्चित कराना होता है। उसी तरह बिना पूर्णता प्रमाण पत्र के लेसा द्वारा बिजली कनेक्शन देना यूपी नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 (संशोधन के साथ धारा 15 (क) में गलत है। ऐसा करके बिजली कनेक्शन देते समय लेसा यूपी विद्युत प्रदान संहिता, 2005 के खंड 4.9 (घ) के प्रावधान का उल्लंघन करता है। इसे रोकने की जरूरत है।
तमाम संसाधनों पर बोझ
एलडीए से लेसा को भेजे जाने वाले प्रारूप में यह भी शामिल किया गया है कि आवासीय भू-उपयोग वाले क्षेत्र में अधिक क्षमता का व्यावसायिक बिजली कनेक्शन देने से न सिर्फ विद्युत क्षमता पर भार पड़ता है, बल्कि इससे सीवर, ड्रेनेज, रोड नेटवर्क पर भी बोझ बढ़ जाता है।
बिजली क नेक्शन काटे लेसा
एलडीए से जाने वाले पत्र में लेसा के अधिशासी अभियंता से कहा जाएगा कि कार्रवाई वाले भूखंड पर बिजली कनेक्शन नहीं दिया जाए। अगर पूर्व में कनेक्शन जारी हो गया है। ऐसे बिजली कनेक्शन को कानूनी कार्रवाई करते हुए काट दिया जाए। आवासीय में व्यावसायिक भू-उपयोग को रोकने के लिए यह जरूरी है।
अभी नियोजित कॉलोनियां, फिर पूरा लखनऊ
वीसी का कहना है कि अभी इस प्रक्रिया को केवल नियोजित कॉलोनियों में ही लागू किया जा रहा है। यहां सफल रहने के बाद इसे अनियोजित कॉलोनियों और नए विकसित हो रहे इलाकों में भी लागू कर दिया जाएगा।