सूत्रों की माने तो 70 जिलाध्यक्षों की पहली सूची में भले ही पांच महिलाओं को ही स्थान मिल पाया है, लेकिन इसमें भी जातीय समीकरण का विशेष ख्याल रखा गया है। जिलाध्यक्ष बनाई गई महिलाओं में भी जातीय समीकरण को तरजीह दी गई है। इनमें भी कुर्मी-1, पासी-1, क्षत्रिय-1 तेली-1 लोधी-1 और जाति की महिलाएं शामिल की गई हैं।
- सवर्ण वर्ग (39) -19 ब्राह्मण, 10 ठाकुर, 3 कायस्थ, 2 भूमिहार, 4 वैश्य एवं 1 पंजाबी
- पिछड़ा वर्ग (25)- यादव-1, बढ़ई-1, कश्यप-1, कुशवाहा-1, पाल-1, राजभर-1, सैनी-1, तेली-1, भुर्जी-1, पिछडा वैश्य 1- कुर्मी-5, मौर्य-2, पिछडा वैश्य-3, लोध-2, जाट-2 गुर्जर-1
- अनुसूचित वर्ग (6)- धोबी, कठेरिया, कोरी 1-1 और 3 पासी
माना जा रहा है कि संगठन का यह स्वरूप अगले साल प्रस्तावित पंचायत चुनाव और उसके बाद होने वाले विधान सभा चुनावों के लिए अहम होगा। इसको ध्यान में रखते हुए भाजपा ने संगठन में हर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। भाजपा की मंशा थी कि वह अपने संगठन में ओबीसी और एससी वर्ग का प्रतिनिधित्व बढ़ाकर विपक्ष के पीडीए के नारे की काट भी निकाले। 70 अध्यक्षों की सूची में भाजपा ने 25 ओबीसी और 6 एससी वर्ग के अध्यक्षों को जगह दी है। महिलाओं की संख्या भी 5 है। जबकि पिछली बार 98 में सिर्फ 4 महिलाएं ही थीं। अभी 28 नामों की घोषणा होनी हैं। इनमें भी ओबीसी, एससी और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।