लोकसभा चुनाव में मैदानी जंग से इतर राजनीतिक दलों की टीमें पर्दे के पीछे से भी मोर्चा संभाले हुए हैं। पार्टियों के ‘वॉर रूम’ से बिसातें बिछाई जा रही हैं।
किस प्रत्याशी के सामने क्या कठिनाई आ रही है, क्या कमी है, किस नेता के जाने या और क्या करने से सीट निकल सकती है, इन सबका आकलन करके इलेक्शन मैनेजमेंट करने वाली टीमें दिन-रात काम कर रही हैं।
यही नहीं वॉर रूम से ही सोशल मीडिया के जरिये भी पार्टी और पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की मुहिम चलाई जा रही है।
भाजपा, कांग्रेस और आप के ‘वॉर रूम’ जहां खासे सक्रिय हैं वहीं सपा और बसपा में इसके लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया गया है। इन पार्टियों के शीर्ष नेता ही पार्टी स्तर पर मैनेजमेंट से लेकर फील्ड तक की कमान संभाले हुए हैं।
जमीनी हकीकत का विश्लेषण
दिन हो या रात, प्रदेश कार्यालय में बनाए गए वॉर रूम में कार्यकर्ता मोर्चा संभाले रहते हैं। इसके लिए शिफ्टवाइज कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगती है।
खबरों के विश्लेषण से लेकर सोशल मीडिया पर प्रचार की कमान इन्हीं के हाथों में हैं। बड़े नेताओं के चुनावी दौरे के लिए हेलीकॉप्टर का इंतजाम भी इन्हीं के जिम्मे रहता है।
सुबह दस से रात दस बजे तक आठ लोगों की टीम समस्याओं को लेकर फील्ड से फीड बैक जुटाती है। प्रत्याशियों से भी फीड बैक लिया जाता है।
रूम की यूनिटें अपना फीडबैक सीधे सह प्रभारी को भेजती हैं, जहां से शीर्ष नेतृत्व को उसे भेजा जाता है। कार्यकर्ता समस्या बता सकें इसके लिए टोल फ्री नंबर पर कॉल की व्यवस्था की गई है।
कॉल सेंटर की तरह होता है काम
यहां की जिम्मेदारी संभाल रहे आईआईटी मुंबई से निकले निशीत अवस्थी बताते हैं कि कॉल रिसीव करने के लिए 8-10 लोगों की शिफ्ट में ड्यूटी रहती है।
सोशल मीडिया सेल में 20 लोग तैनात हैं। प्रभारी राकेश त्रिपाठी बताते हैं कि इन्हें भाजपा की नीति के अनुरूप फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर के इस्तेमाल की विशेष ट्रेनिंग दी गई है।
वे पार्टी के ‘यूपी पेज’ पर तो सामग्री डालते ही हैं, अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों के लिए बनाए गए पेजों को अपडेट करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की है।
किस लोकसभा क्षेत्र में कल क्या कार्यक्रम होने हैं, इसका पूरा ब्यौरा इन पेजों पर रहता है।
तेजी में इनका जवाब नहीं
वॉर रूम की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इधर पार्टी का घोषणा पत्र आया और उसके प्रमुख बिंदु सोशल साइट पर अपलोड कर दिए गए।
नेताओं के भाषण हों या कार्यकर्ताओं के दिए नारे, यही टीम पोस्ट करती है।
इसमें टाइमिंग का विशेष ख्याल रखा जाता है जिससे कि टीवी पर न्यूज आते ही, साइट पर उसे अपलोड कर दिया जाए।
भाजपा ने काफी पहले से ही सोशल मैनेजमेंट पर ध्यान दिया था।
14 घंटे काम करता है कांग्रेसी 'वॉर रूम'
प्रदेश कांग्रेस का वॉर रूम 12 से 14 घंटे काम कर रहा है। सुबह नौ बजे से रात 10 बजे तक यहां का फोन घनघनाता रहता है।
प्रत्याशियों के चुनाव प्रबंधन की निगरानी के साथ-साथ यहां से स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं।
किसी तरह की कोई कठिनाई होने पर प्रत्याशियों को सीधे वॉर रूम से संपर्क करने की हिदायत दी गई है। प्रत्याशी वॉर रूम को बताते हैं कि उन्हें कौन सा स्टार प्रचारक चाहिए।
कार्यक्रम और हेलीकॉप्टर उतरने तक की परमिशन लेने का काम भी वॉर रूम करता है। चुनाव के लिए कांग्रेस ने सात हेलीकॉप्टर किराए पर लिए हैं।
प्रत्याशी के निर्देश पर तैयारी
वॉर रूम की जिम्मेदारी डॉ. आरपी त्रिपाठी व आरपी सिंह के कंधों पर है। सिंह बताते हैं कि प्रत्याशी मनचाहे स्टार प्रचारकों की डिमांड करते हैं।
इसके बाद तारीख और चीजों को मैनेज करने का जिम्मा टीम को होता है। स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम के दिन भी चॉपर के पायलट से लेकर स्टार प्रचारकों तक से सीधे फोन लाइन पर वॉर रूम के लोग कनेक्ट रहते हैं।
यह सिलसिला सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक चलता है। उत्तर प्रदेश में पहले चरण के चुनाव के बाद वॉर रूम और गरमाएगा। दरअसल, पहले चरण के जहां चुनाव होने हैं, उनके ज्यादातर जिले दिल्ली से पास हैं।
सोशल मीडिया के लिए युवा टीम
यह भी जिम्मेदारियां: सोशल मीडिया का पूरा सेटअप अलग से बना हुआ है। इसकी कमान शिव पांडेय के हाथ में है।
इसमें युवाओं की टीम कांग्रेस की नीतियों को सोशल मीडिया में स्टेटस अपडेट कर रहे हैं।
हांलांकि भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम बाद में बनी, फिर भी इन्हें विश्वास है कि पार्टी सोशल मीडिया द्वारा माहौल को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहेगी।
सोशल मीडिया पर नहीं बसपा को यकीन
सिंबल...सीडी..और अपील। बसपा प्रत्याशियों को पार्टी की ओर से कुलजमा यही सहयोग मिल रहा है।
इसके अलावा बसपा सुप्रीमो मायावती की जनसभाओं के मंच, टेंट, माइक और कुर्सी से लेकर पूरा बंदोबस्त पार्टी की ओर से होता है तो बाकी नेताओं के कार्यक्रम और क्षेत्र में माहौल बनाने में प्रचार का सारा तामझाम प्रत्याशियों के मत्थे।
बसपा ने राष्ट्रीय दल के रूप में अपनी पहुंच यूपी के बाहर दिल्ली, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल आदि राज्यों तक बना ली है लेकिन प्रचार के अत्याधुनिक माध्यमों व सोशल मीडिया से वास्ता आज तक नहीं जोड़ा है।
कार्यालय में माहौल भी नहीं
लोकसभा के लिए कोई खास हलचल नहीं सिर्फ प्रेस-कॉन्फ्रेंस और प्रेस-नोट तक सीमित है। बसपा के प्रदेश मुख्यालय पर पहुंचकर यह अंदाजा लगाना बेहद कठिन है कि यह उस पार्टी का कार्यालय है जिसकी मुखिया देश की दिग्गज पार्टियों से अकेले मोर्चा ले रही हैं।
यहां आम दिनों से हटकर ऐसा कुछ भी नजर नहीं आता जिससे यह अंदाजा लगाया जा सके कि ये आमचुनाव के दिन हैं।
सूबे की सभी 80 सीटों पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ रही इस पार्टी के कार्यालय में नए निर्माण कार्यों की वजह से कुछ हलचल जरूर नजर आती है।
एक दो पदाधिकारी करते हैं मैनेज
पार्टी के प्रत्याशी बताते हैं कि कोई बड़ी मुश्किल हो तो राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी से बात हो जाती है, नहीं तो जोनल कोऑर्डिनेटर ही हमारे मुखिया हैं।
कोई सूचना होती है तो प्रदेश कार्यालय से आरए मित्तल या मायावती के सरकारी आवास पर कार्य देखने वाले मेवालालजी से मिल जाती है।
बसपा के पास कांग्रेस या भाजपा जैसा वॉर रूम नहीं है, लगता है कि पार्टी को यकीन है कि उनका दायरा कुछ प्रदेशों और देश के दलितों तक ही सीमित है, इसलिए पार्टी एक विशेष वर्ग तक ही सीमित लगती है।
थीम सांग है प्रचार का हथियार
सूबे की सत्ताधारी पार्टी सपा के शीर्ष नेता अपने को प्रचार में पीछे जरूर बता रहे हैं लेकिन संभवत: यह पहली बार है कि जब इस पार्टी ने प्रचार के सारे अत्याधुनिक माध्यमों को आजमाया है।
‘डिजिटल बुक’ का प्रयोग हो या पार्टी के थीम सॉन्ग ‘मन से हैं मुलायम, इरादे लोहा हैं’, आम लोगों तक पहुंच बनाने की तरकीब में यह साफ नजर आती है।
सपा के प्रदेश मुख्यालय पर चुनाव के लिए ऊपरी तौर पर कोई हटकर विशेष प्रबंध तो नजर नहीं आते लेकिन यहां हर वक्त पार्टी नेताओं की भीड़ और उनकी बात सुनने और समाधान करने का मुकम्मल बंदोबस्त है।
पार्टी के प्रदेश महासचिव एसआरएस यादव कार्यालय का संयोजन करते हैं तो मौके-मौके पर प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी भी मिल जाते हैं।
अखिलेश, मुलायम और् सोशल मीडिया
सपा नेता बताते हैं कि चुनाव के दौरान प्रत्याशी सीधे नेता जी और मुख्यमंत्री के टच में रहते हैं, उन्हें किसी तरह की कोई मुश्किल नहीं होने वाली।
मीडिया से बना रहता है संपर्क
पार्टी के नेता न सिर्फ नियमित इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के संपर्क में रहते हैं बल्कि सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर सीएम अखिलेश यादव दमदारी से हाजिर हैं।
वे फेसबुक पर अपने आगामी कार्यक्रम की जानकारी तो देते ही हैं, कार्यक्रम खत्म होते ही उसके फोटो और भाषण अपलोड कर दिए जाते हैं।
अगर किसी खास मेहमान से मुलाकात की है या खास चैनल पर इंटरव्यू का प्रसारण आना है, मुख्यमंत्री यह भी शेयर करना नहीं भूलते।
'आप' ने दी युवाओं को जिम्मेदारी
आम आदमी पार्टी का वॉर रूम औरों से थोड़ा अलग है। इसकी जिम्मेदारी एकदम युवा टीम संभाल रही है। यहां स्टार प्रचारकों के लिए प्रदेश की टीम सीधे उस स्टार प्रचारक के पीए से प्रत्याशी को लाइनअप करा देती है।
इसके बाद प्रत्याशी व उस स्टार प्रचारक के पीए कार्यक्रम तय करते हैं। कार्यक्रम होने से पहले प्रदेश की एक एडवांस टीम यह देखकर जरूर आती है कि वहां तैयारियां कैसी हैं।
हालांकि जिला स्तर की टीम को ज्यादा जिम्मेदारियां दी गई हैं। प्रत्याशी के चुनाव प्रचार प्रबंधन का पूरा काम जिले की ही टीम कर रही है।
सोशल मीडिया है प्रमुख हथियार
वॉर रूम में आईटी की जिम्मेदारी अनिकेत संभाल रहे हैं। अनिकेत सोशल मीडिया में आप आदमी पार्टी के सारे अपडेट अपलोड करते हैं। पार्टी ने एक वाट्सऐप पर भी मीडिया का एक ग्रुप बना रखा है। इसमें भी जरूरी जानकारियां एक-दूसरे से शेयर करते रहते हैं।
जबकि मीडिया की जिम्मेदारी सुधीर भारद्वाज व वैभव माहेश्वरी निभा रहे हैं। जबकि मॉनिटरिंग का काम आशुतोष व अकाउंट का काम उज्जवल संभाल रहे हैं।
अनिकेत बताते हैं कि आप के प्रत्येक स्टार प्रचारकों के साथ उनके पर्सनल सेक्रेटरी या पीए लगे हुए हैं। प्रदेश का वॉर रूम बीच में पड़ने के बजाय सीधे प्रत्याशी को इनसे संपर्क करा देता है। इसके बाद कार्यक्रम तय हो जाता है।