यहां से हम इंदर गांव पहुंचे, जहां मुस्लिम आबादी के बीच हिंदू सम्मेलन हो रहा था। हिंदू राष्ट्र नेपाल के झंडे-बैनर हर तरफ दिखे। हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) की कृष्णा देवी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। उन्होंने हमसे बस इतना कहा...हामी राम्रो नेपाल चाहन्छौं। स्थिर नेपाल चाहन्छौं। हामीलाई पनि विकास चाहिन्छ। देशका युवा र महिलाहरूले यसलाई राम्रोसंग बुझिसकेका छन (हम बेहतर नेपाल चाहते हैं।
स्थिर नेपाल चाहते हैं। हमें भी विकास चाहिए। देश के युवा व महिलाएं इसे अच्छी तरह से समझ चुकी हैं।) कृष्णा देवी जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चिंतित दिखीं। उन्होंने बेबाकी से कहा, इन बाहर से आने वाले लोगों के कारण हमारी सभ्यता, संस्कृति और रीति-रिवाज पर खतरा मंडरा रहा है।
यही लोग हमारे रोटी-बेटी के रिश्तों के लिए भी घातक हैं। तुष्टीकरण के कारण इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हम इसके विरोध में हैं। नेपाल में इसके लिए जनजागरण जरूरी है। यहीं की सलमा, मकदुम शाह व नूरूल ने स्थानीय प्रत्याशी के इतर हमसे बस प्रधानमंत्री के चेहरे पर बात की।
यहां से हम बलरामपुर से लगे दांग जिले में पहुंचे। यहां चुनाव का उत्साह था। लोग चुनावी चर्चा में बेबाकी से बोले भी। यहां के विधुन गुरुंग से हमने नेपाल के भारत व चीन से रिश्ते पर बात करनी चाही। उन्होंने इन्कार कर दिया। कहा, हम सिर्फ नेपाल और नेपाल की तरक्की की चर्चा चाहते हैं। वैसे नेपाल के लिए जितना भारत अहम है, उतना ही चीन भी। अलबत्ता, नूरूल का मत कुछ अलग रहा। वह भारत को संदेह की दृष्टी से देखते हैं। विस्तारवाद का आरोप लगाकर चीन व बांग्लादेश के लिए ज्यादा अहम मानते हैं।