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कोरोना के वार से दवा बाजार पर भी संकट, थोक व्यापार में 70 फीसदी तक गिरावट

Sat, 16 May 2020 12:05 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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 कोरोना से लखनऊ के अमीनाबाद दवा बाजार पर भी संकट छा गया है। थोक कारोबार में करीब 70 फीसदी की गिरावट आई है। हालत यह है कि दवा कारोबारी दुकानों के किराये और कर्मचारियों का वेतन तक नहीं दे पा रहे हैं।
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उनका कहना है कि दवाओं की कीमत में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की है। ऐसे में सरकार उन्हें प्रोत्साहन के नाम पर टैक्स और बिजली में कुछ छूट दे तो राहत मिलेगी। राजधानी में करीब 850 थोक दवा कारोबारी है। इसमें करीब 650 अमीनाबाद बाजार में हैं।

सामान्य दिनों में इनका रोजाना औसतन 25 से 30 करोड़ का कारोबार होता था, जो अब 8-10 करोड़ के बीच सिमट गया है। वहीं, शासनादेश के तहत कुछ दुकानें सुबह 6 से 9 बजे तक तो कई रात 8 से 11 बजे तक खुल रही हैं।
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एक दिन में सिर्फ 40 दुकानें खोलने की अनुमति है। इससे दूसरी दुकानों का नंबर अगले दिन आता है। ऐसी स्थिति में एक दुकानदार को तीन दिन में एक शिफ्ट में दुकान खोलने का मौका मिल रहा है। वहीं, दुुकान पर काम करने वालों को वेतन देना भी मुश्किल हो रहा है।
 
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ओपीडी बंद होने का भी असर

खर्च बढ़ा, आमदनी घटी
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष गिरिराज का कहना है कि लॉकडाउन में फर्म चलाना मुश्किल हो रहा है। बिजली खर्च हो रही है। सैनिटाइजर सहित अन्य सुरक्षा उपकरण अपनाने होते हैं। ऐसे में खर्च बढ़ गया है, वहीं आमदनी घट गई है। सरकार को चाहिए कि टैक्स सहित अन्य मदों में राहत दे। 
किसी न किसी रूप में राहत की जरूरत
द केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सचिव गजनफर का कहना है कि दवा कारोबारी निर्धारित दर पर दवाएं बेच रहे हैं, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इन दिनों कारोबार करीब 70 प्रतिशत गिर गया है। ऐसे में कारोबारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

दवा कारोबारियों का कहना है कि दो माह से ओपीडी बंद है। इससे भी फुटकर दुकानदारों की बिक्री घटी है। इमरजेंसी वाले ही दवाएं ले रहे हैं। फुटकर कारोबार कम होता है तो थोक कारोबार पर खुद असर आ जाता है। फुटकर में जितनी बिक्री हो रही है उतना स्टॉक लोगों के पास है। आसपास के ग्रामीण इलाके के दवा कारोबारी भी दवाई खरीदने नहीं आ रहे हैं। 
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