ईडी के सूत्रों के अनुसार, जवाब देने के दौरान गायत्री की जबान कई बार लड़खड़ाई। कई सवालों पर उन्होंने पहले आरोप स्वीकार किए, पर बाद में मुकर गए। गायत्री कुछ सवालों पर चुप्पी साध गए और कुछ सवालों के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कह कर उसे टालने की कोशिश करते नजर आए।
इस बीच उन्होंने दो से तीन बार तबीयत बिगड़ने की बात कही, जिस पर चिकित्सकों को बुलाया गया और फिर पूछताछ का सिलसिला शुरू कर दिया गया।
सूत्र बताते हैं कि ईडी के तीखे सवालों के बचने के लिए गायत्री ने कई पैंतरे बदले। कुछ सवालों को वे बेबुनियाद बताने की कोशिश करते रहे तो कुछ पर कहा कि उन पर गलत आरोप लगाया जा रहा है।
ऐसे जवाबों पर ईडी उनकी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज दिखाती तब वे चुप्पी साध जाते। ईडी ने गायत्री से उनके उन करीबियों व रिश्तेदारों की संपत्तियों के बारे में भी सवाल किए जो गायत्री की बताई जा रही हैं।
ईडी ने गायत्री से उनके कार्यकाल में नियमों को दरकिनार कर किए गए पट्टों के कुछ आवंटन को लेकर भी सवाल किए। ईडी ने उनसे पूछा कि इन आवंटन से उन्हें क्या लाभ मिला।
ईडी ने इसके साथ ही गायत्री के बैंक खातों व अचल और बेनामी संपत्ति को लेकर भी पूछताछ की।