सालाना करीब 60 करोड़ रुपये वसूलने के बाद भी शहर को कूड़ाघर बनाने वाली चीनी कंपनी ईकोग्रीन एनर्जी पर शासन की फिर मेहरबानी हो गई है। इसे हटाने की चल रही प्रक्रिया को निकाय चुनाव की आचार संहिता की आड़ लेकर स्थगित कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अब कंपनी ही शहर में कूड़ा उठाएगी। चुनाव बाद कंपनी हटेगी या नहीं, जिम्मेदार इस पर भी कुछ कहने से बच रहे हैं। करीब तीन साल पहले भी शासन में बैठ लोगों ने ही कंपनी को बचाया था।
कूड़ा प्रबंधन को लेकर ईकोग्रीन लापरवाह है। इसे लेकर नगर आयुक्त ने जनवरी में ही नगर निगम स्तर पर अनुबंध निरस्त कर प्रमुख सचिव नगर विकास को रिपेार्ट भेजी थी। इसमें कहा था कि कंपनी से तीन पक्षीय अनुबंध है, ऐसे में इसे पूरी तरह से हटाने के लिए शासन की ओर से जल निगम भी अनुबंध निरस्त करे। इसके बाद एक मार्च को मंडलायुक्त रोशन जैकब ने डीएम व नगर निगम के प्रशासक सूर्यपाल गंगवार को पत्र लिखा था कि वे ईकोग्रीन को हटाने के लिए फाइनल टर्मिनेशन नोटिस जारी करें।
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इसके बाद से कंपनी को हटाने की कवायद चल रही थी। एक सप्ताह से आजकल-आजकल में नोटिस जारी होने की बातें चल रही थीं, पर यह जारी नहीं हुआ। वहीं, शनिवार को नगर निगम मुख्यालय में देर रात तक चली बैठक में तय किया गया कि रविवार से नगर निगम ही घरों से कूड़ा कलेक्शन के साथ पड़ावघरों से कचरा उठाकर शिवरी प्लांट पहुंचाएगा। नगर आयुक्त ने भी इसकी जानकारी दी। रविवार को इस पर अमल हुआ, लेकिन सोमवार को अचानक प्रमुख सचिव नगर विकास की ओर से शासन में कूड़ा उठान की समीक्षा के नाम पर बुलाई विशेष बैठक में कहा गया कि मंगलवार से ईकोग्रीन ही कूड़ा उठाएगी।
सूत्रों के अनुसार निकाय चुनाव की आचार सहिंता की आड़ में मामला टाल डाल दिया गया। बैठक में निदेशक स्थानीय निकाय नेहा शर्मा, मंडलायुक्त रोशन जैकब, डीएम सूर्यपाल गंगवार और नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह शामिल हुए। बैठक के लिए जोनल सिनेटरी अधिकारी और अपर नगर आयुक्त भी बुलाए गए थे, पर इन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया।
बैठक के बाद खामोश हो गए अफसर
शनिवार को शहर की कूड़ा संबंधी सारी व्यवस्था नगर निगम से ही कराने का दावा करने वाले नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह भी प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात की बैठक के बाद खामोश हो गए। बैठक में क्या हुआ और नगर निगम अब क्या करेगा, इसकी जानकारी लेने के लिए उन्हें कई फोन किए गए, पर कॉल नहीं उठी। कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले अपर नगर आयुक्त पंकज सिंह ने भी किसी कॉल का जवाब नहीं दिया। उधर, अधिशासी अभियंता पीके सिंह जनता को जानकारी नहीं दे पा रहे कि जगह-जगह पड़ा कचरा कब साफ होगा।
कर्मचारियों को दिलाया जाएगा वेतन
डीएम ने कहा कि अभी ईकोग्रीन ही काम करेगी। कूड़ा उठान को लेकर कर्मचारियों को वेतन न दिए जाने का मामला सामने आया है। कंपनी को निर्देश दिए गए हैं कि वह वेतन जारी करे। इसके लिए अपर नगर आयुक्तों को जिम्मेदारी दी गई है। शहर में जो भी कूड़ा पड़ावघरों पर है, उसे जल्द उठाने के लिए कहा गया है। इसके लिए गाड़ियों के ज्यादा फेरे शिवरी प्लांट तक लगाए जाएंगे।
शिवरी प्लांट पर नहीं बची कूड़ा डालने की जगह
ईकोग्रीन पर यह मेहरबानी तब की जा रही है जब उसकी लापरवाही से शिवरी प्लांट पर 25 लाख मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ बन चुका है। यहां अब और कचरा डालने की जगह नहीं बची है। कंपनी की लापरवाही के चलते ही नगर निगम पर एनजीटी 50 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगा चुकी है। पुरनिया ट्रांसफर स्टेशन भी एनजीटी के आदेश पर बंद कर दिया गया। गोमतीनगर का ग्वारी ट्रांसफर स्टेशन कूड़े से फुल है और यहां भी कचरा डालने की जगह नहीं है। गोमतीनगर में नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला के सामने बनाया गया नया ट्रांसफर स्टेशन भी ठप हो गया। इसके पास डंप किया कचरा न उठाने से दो बार आग भी लग चुकी है। इसे लेकर नगर निगम ने ईकोग्रीन पर एक बार एफआईआर भी कराई थी।