चुनाव आयोग ने अब तक का सबसे बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी अमित शाह और आजम खां के चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी है।
गौरतलब है कि आजम खां और अमित शाह दोनों ही अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहें।
चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई रोक के बाद अब आजम और शाह दोनो ही रोड शो, रैलियां और सभाएं नहीं कर सकेंगे।
शाह और आजम दोनों ने दिये बयान
आजम खान ने एक चुनावी रैली में कहा था कि कारगिल युद्घ में जीत मुसलमान सैनिकों की बदौलत मिली थी। इसलिए मुसलमानों को कम न आंका जाए।
आजम के बयान पर कारगिल युद्घ में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों ने गहरी नाराजगी जताई थी और कहा था कि सांप्रदायिकता सेना के जवान नहीं बल्कि आजम खां जैसे घटिया नेता फैला रहे हैं।
इसी तरह अमित शाह ने भी एक विवादित बयान दिया था। जिस पर उनकी गिरफ्तारी की मांग कांग्रेस और अन्य दलों ने की थी।
शाह के बयान से मची खलबली
अमित शाह ने मुलायम सिंह के नाम को एक खास समुदाय से जोड़ते हुए बयान दिया था कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही उत्तर प्रदेश में मुलायम की सरकार गिर जाएगी।
शाह ने लोगों से अपील की थी कि अब बदला लेने का वक्त आ गया है। इसलिए आगामी चुनाव में बदलाव के लिए वोट करें।
यह ध्यान देने योग्य है कि अभी तक चुनाव आयोग ने गलत बयानबाजी पर संबंधित नेता को सिर्फ घुड़की ही दी थी।
यह पहला मौका है जब गलत बयान बाजी के कारण राजनेताओं के चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी गई हो।