प्रत्याशी से लेकर पार्टियां तक सभी चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं। आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में अब भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह और सपा प्रत्याशी मित्रसेन यादव को जिला प्रशासन ने नोटिस भेजी है।
प्रशासन ने इसका जवाब मांगा है। आरोप है कि प्रत्याशियों नामांकन जूलूस में प्रशासन की अनुमति से ज्यादा वाहन चल रहे थे।
लोकसभा चुनाव में नामांकन के लिए भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह ने रोड शो निकाला था। इसमें पार्टी के नेताओं के साथ ही समर्थकों की बड़ी भीड़ और कई वाहन भी शामिल बताए गए थे।
इसी तरह सपा प्रत्याशी मित्रसेन यादव ने रोड शो निकालकर दोबारा नामांकन किया था। इसमें सूबे के मंत्री अवधेश प्रसाद, तेज नरायन पांडेय पवन सहित पार्टी के कई धुरंधर मौजूद थे। इसमें भी वाहनों का काफिला लंबा था।
प्रशासन ने कराई वीडियोग्राफी
प्रशासन ने इन जुलूसों की वीडियोग्राफी कराई थी। वीडियोग्राफी के अवलोकन के बाद यह फैसला लिया गया।
दोनों दलों को नोटिस भेजकर इसका जवाब मांगा गया है। कांग्रेस को प्रशासन की ओर से पहले ही एक नोटिस दी जा चुका है।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन व चुनाव आदि में जुलूस आदि के प्रभारी एके सिंह ने बताया कि भाजपा और सपा प्रत्याशियों ने नामांकन जुलूस के लिए जितने वाहनों की अनुमति ली थी।
उससे कहीं ज्यादा वाहन उनके जुलूस में शामिल थे। कराई गई वीडियोग्राफी के अवलोकन से यह बात साफ हो गई है। इसलिए दोनों प्रत्याशियों को नोटिस भेजी गई है।
शाह आजम पर लगा था प्रतिबंध
इसके पहले चुनाव आयोग ने भड़काऊ भाषण देने के कारण उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रभारी अमित शाह और समाजवादी पार्टी के कैबिनेट मंत्री आजम खां पर प्रतिबंध लगा दिया था।
आजम ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि कारगिल युद्घ मुस्लिम सैनिकों की वजह से जीता जा सका था।
इसके अलावा उन्होने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को 'कुत्ते का बच्चा' भी कहा था।
जिसके बाद मोदी ने एक कार्यक्रम में पलटवार करते हुए कहा था कि कुत्ता सबसे वफादार जीव है।
आजम को नहीं मिली राहत
चुनाव आयोग ने माफी मांग लेने के कारण अमित शाह पर चुनाव प्रचार करने का लगा प्रतिबंध हटा लिया था।
वहीं आजम खां ने माफी मांगने से इनकार किया और चुनाव आयोग के खिलाफ सु्प्रीम कोर्ट जाने की भी धमकी दी थी।
इस मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त वी एस संपत ने जवाब देते हुए कहा था कि यह आजम पर निर्भर करता है कि वह राहत चाहते हैं या नहीं।
संपत के अनुसार चुनाव आयोग किसी की शर्ते मानने के लिए बाध्य नहीं है।