हर हर महादेव के जयघोष के साथ सावन के पहले सोमवार से शिवार्चन का दौर शुरू हो चुका है। इसी के साथ शिवालयों में एक माह तक भोले को पूजने भक्त उमड़ेंगे और मंगलकामनाएं करेंगे।
दुर्लभ योग के चलते इस बार सावन के पांचों सोमवार का विशेष महत्व है। भोर से शिवालयों के कपाट खुलने के साथ ही रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना का दौर शुरू होगा, जो देर रात तक जारी रहेगा।
चालीसा, पंचाक्षर के स्वरों के बीच दिनभर भक्त फल, पुष्प, बिल्व पत्र, गंगाजल, शहद, घृत, दूध, मिष्ठान्न, भांग, धतूरा से भोले की आराधना करेंगे और मन वांछित फल की मनोकामना करेंगे।
दुर्लभ योग के चलते नामी शिवालयों में इस बार भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद के चलते विशेष तैयारियां की गई है। सुरक्षा के भी माकूल इंतजाम किए गए हैं।
शिव उपासना का मास है सावन
शिव मंदिर में सावन की तैयारी
श्रावण माह में भगवान शिव की उपासना, साधना, आराधना का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार श्रावण माह मे भगवान शिव के कैलाश आगमन के कारण शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अनेक तरह के उपाय करते हैं।
आचार्य प्रदीप के मुुताबिक शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि श्रवण मास के सोमवार के व्रत मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और मनचाहा वर देते हैं।
शिव कृपा से भक्तों को दैहिक, वैदिक, भौतिक, आर्थिक आदि शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस बार तमाम संयोगों के अलावा पांच सोमवार, सावन की शुरुआत और समाप्ति भी सोमवार से ही हो रही है।
सुख-समृद्धि के लिए सावन में यूं करें शिव पूजन
- वाहन सुख के लिए गुलाब के फूलों से ढक कर पूजन करें।
- संतान सुख के लिए धतूरे के फल से शिवपूजन करें।
- आरोग्यता के लिए कुशा से पूजन करें।
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए शर्करा या ईख रस से पूजन करें।
- अभीष्ट सिद्धि के लिए शहद से पूजन फलदायी रहेगा।
- समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए गौदुग्ध से पूजन करें।
श्रावण मास में क्या करें
डेमो पिक
- भगवान शिव की उपासना के साथ श्रद्धानुसार सुयोग्य पात्र का दान अवश्य करें।
- पूजन के उपरान्त कथा अवश्य सुनें लाभ मिलेगा।
- दीन, दुखियों, गरीबों की सेवा अवश्य करें।
- ऊँ नम: शिवाय मन्त्र का जप प्रतिदिन 108 बार अवश्य करें।
- लघु मृत्युन्जय मन्त्र, महामृत्युन्जय मंत्र जप भी लाभकारी प्रतीत होगा।
- शिवजी का व्रत शुभकारक, फ लकारक होता है इसलिये इसे पूर्ण श्रद्धा से करें, लाभ प्राप्त होगा।
- सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवजी के साथ-साथ गणेश जी, पार्वती जी, नन्दी की भी पूजा करनी चाहिये ताकि पूर्ण फ ल प्राप्त हो सके।
- श्रावण मास में साग खाना वर्जित किया गया है।