लखनऊ मेट्रो का काम उसी तेजी से चल रहा है, जिस तेजी से उसकी योजना बनाई गई थी। ऐसे में लखनऊ में मेट्रो अपने तय समय पर जरूर चलेगी। समय पर काम पूरा करने के अलावा एक सबसे अच्छी बात यह है कि लखनऊ मेट्रो में गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा गया है।
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मैं अब तक कई मेट्रो प्रोजेक्ट के साथ जुड़ा हूं, लेकिन गुणवत्ता के मामले में लखनऊ मेट्रो नंबर वन है। यह कहना है मेट्रो मैन ई श्रीधरन का, जो बुधवार को लखनऊ में मेट्रो के काम की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।
उनका कहना था कि मैंने आते ही सबसे पहले साइट इंस्पेक्शन किया। प्राथमिकता सेक्शन के काम को मौके पर जाकर देखा। कंपनी के इंजीनियर्स और अधिकारियों के साथ प्रोजेक्ट पर बात की। इसके बाद मेरा निष्कर्ष यही है कि मेट्रो के चलने में देरी नहीं होगी।
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चारबाग से आगे भी काम शुरू कर रहा है एलएमआरसी
उन्होंने कहा, प्राथमिकता सेक्शन से आगे भी अब हम योजना बनाकर काम कर रहे हैं। चारबाग से आगे भी अब एलएमआरसी काम शुरू कर रहा है।
यहां 3.5 किमी. में भूमिगत सुरंग का निर्माण होना है। इससे आगे मुंशी पुलिया तक एलीवेटिड मेट्रो रूट रहेगा। प्राथमिकता सेक्शन के बाद मेट्रो यहीं सबसे पहले चलेगी।
ई श्रीधरन का कहना था कि एलएमआरसी अब टेंडर प्रक्रिया कमोबेश पूरी कर चुका है। अब मेट्रो का ऑपरेशन शुरू करने की दिशा में काम चल रहा है। स्टाफ की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। हैंड्स ऑन ट्रेनिंग दिल्ली मेट्रो में होगी।
मैं खुद स्टाफ को प्रशिक्षण दूंगा, जिससे मेट्रो के संचालन में कोई कमी न रहे। मुझे यह कहते हुए कतई संकोच नहीं है कि लखनऊ अब जल्दी ही विश्वस्तरीय मेट्रो सुविधा का अनुभव करने जा रहा है।
एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन भूमिगत बनेगा
श्रीधरन ने बताया कि अब अमौसी एयरपोर्ट स्टेशन पर काम शुरू होगा। यहां यात्रियों की सुविधा के लिए लगातार एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ वार्ता चल रही थी। सुरक्षा कारणों को भी हमें ध्यान में रखना था। अब इस स्टेशन का डिजाइन फाइनल हो गया है। स्टेशन से केवल 100 मीटर यात्रियों को पैदल आना-जाना होगा।
यात्रियों की सुविधा के लिए लखनऊ मेट्रो और एयरपोर्ट अथॉरिटी संयुक्त रूप से सामान ले जाने के लिए विशेष ट्रॉली की व्यवस्था स्टेशन और एयरपोर्ट के बीच करेंगे। यहां एक विशेष कॉरीडोर यात्रियों के लिए मेट्रो स्टेशन और एयरपोर्ट के बीच बनेगा। स्टेशन भूमिगत होगा। इसको दो लेयर में बनाया जाना है।
मेट्रो निर्माण को 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं बना सकते
श्रीधरन ने आलमबाग मेट्रो स्टेशन की घटना पर कहा कि मेट्रो जैसे इतने बडे़ निर्माण को 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं बना सकते। मेरा मानना है कि यह निर्माण बहुत सुरक्षित ढंग से हो रहा है। इसकी वजह से कोई बड़ा घटना या हादसा नहीं हुआ। भूमिगत सुरंग के निर्माण के समय भी हम लोगों को जागरूक करेंगे। ट्रैफिक डायवर्जन तक में लोगों की सुविधा को देखकर ही कोई फैसला लिया जाएगा।
ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर की डीपीआर दो महीने में
श्रीधरन ने बताया कि मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर की डीपीआर को अपडेट किया जा रहा है। इस काम को अगले दो महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद डीपीआर को राज्य सरकार को भेज दिया जाएगा।
यहां से संस्तुति के बाद डीपीआर केंद्र सरकार को अनुमति के लिए चली जाएगी। इस कॉरीडोर पर चारबाग से बसंत कुंज को लिंक किया जाना है।
52 सीसीटीवी कैमरा स्टेशन पर करेंगे निगरानी
एमडी कुमार केशव ने बताया कि स्टेशनों को सुरक्षित बनाने के लिए कई प्लानों पर काम हो रहा है। पूरे स्टेशन पर कुल 52 सीसीटीवी कैमरा लगे होंगे। स्टेशन पर कोई डार्क स्पॉट नहीं होगा। हर एक कोना सीसीटीवी की निगरानी में होगा।
इसके अलावा लगेज स्कैनर, डोर फ्रेम्ड मेटल डिटेक्टर, सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए जाएंगे। किसी यात्री पर शक होने पर सुरक्षाकर्मी उससे अलग से पूछताछ और जांच भी कर सकते हैं।
लखनऊ-कानपुर के बीच रैपिड रेलवे ट्रांजिट की जरूरत
लखनऊ-कानपुर के बीच बेहतर कनेक्टिविटी को लेकर मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के प्रधान सलाहकार ई. श्रीधरन ने रैपिड रेलवे ट्रांजिट (आरआरटी) को अच्छा विकल्प बताया है।
उनका कहना है कि इन दोनों शहरों के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी नहीं बल्कि आरआरटी की जरूरत है। कारण, आरआरटी कहीं ज्यादा तेज है और मेट्रो की तुलना में इसपर करीब एक चौथाई ही खर्च सरकार को करना होगा। रोजाना लखनऊ से कानपुर के बीच 50 हजार के बीच यात्री अप-डाउन करते हैं।
लखनऊ से कानपुर को मेट्रो से जोड़ने की संभावना पर ई. श्रीधरन ने यह सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में अब सोचना चाहिए। दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इस दिशा में काम शुरू किया है। यहां आरआरटी से अलवर, मेरठ और रेवाड़ी को जोड़ा जाना है। इन शहरों की दूरी भी लखनऊ से कानपुर के बीच की दूरी के लगभग बराबर ही है।
आंध्रप्रदेश सरकार ने भी आरआरटी से विजयवाड़ा और नजदीकी शहरों को कनेक्ट करने केलिए पहल की है। यूपी सरकार भी इस दिशा में काम कर सकती है।
आरआरटी मेट्रो ट्रेन की तरह ही नजदीकी दूरियों को तय करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। इसमें मेट्रो और लोकल ट्रेन की तरह ही दैनिक यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह तेज गति से पहुंचने की सुविधा मिलती है।
इसके कोच की डिजाइन मेट्रो से अलग होती है जिससे इनकी गति बढ़ जाती है। हालाकि इसके लिए भी मेट्रो की तरह अलग से कॉरिडोर बनाना होता है।
आरआरटी की स्पीड ज्यादा, खर्च मेट्रो का एक चौथाई
लखनऊ-कानपुर के बीच आरआरटी क्यों बेहतर विकल्प है, इस सवाल पर ई श्रीधरन कहते हैं कि मेट्रो एक खर्चीला प्रोजेक्ट है।
मेट्रो में स्टेशन एक-एक किमी पर होते हैं लिहाजा ये कम दूरी और भीड़भाड़ वाली जगहों को कनेक्ट करने का बेहतर विकल्प है। मेट्रो की औसत स्पीड 35 किमी प्रति घंटा होती है। यानी ज्यादा दूरी के लिए यह बेहतर विकल्प नहीं है।
वहीं आरआरटी में स्टेशनों के बीच दूरी 3-5 किमी होती है। इसकी औसत स्पीड 80 किमी प्रतिघंटा और अधिकतम स्पीड 180 किमी प्रतिघंटा होती है। आरआरटी को जमीन पर ट्रैक और एलीवेटेड रूट दोनों से चलाया जा सकता है। वहीं, इसकी लागत भी मेट्रो की तुलना में एक-चौथाई आती है।