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Lucknow News: कपड़ों की डाई ठप, हर दिन 30 करोड़ का नुकसान

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कपड़ों की डाई ठप।
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लखनऊ। व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की किल्लत ने चिकनकारी उद्योग की कमर तोड़ दी है। कपड़ों की रंगाई का काम ठप हो गया है, जिससे तैयार माल शोरूमों तक नहीं पहुंच पा रहा। व्यापारियों का अनुमान है कि प्रतिदिन लगभग 30 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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लखनऊ का ''एक जनपद एक उत्पाद'' उत्पाद चिकनकारी कपड़ों की कटाई, छपाई और डाई से लेकर कढ़ाई जैसे कई चरणों से गुजरता है। चौक के कारोबारी शैलेंद्र दीक्षित व नितेश अग्रवाल बताते हैं कि कढ़ाई के बाद कपड़ों को अलग-अलग रंगों में रंगा जाता है, लेकिन सिलिंडर न होने से रंगरेजों की भट्ठियां ठंडी पड़ी हैं। लाटूश रोड और चौक के कारोबारियों का कहना है कि होली के बाद से ही आपूर्ति बाधित है, जिससे ईद की तैयारियों और पुराने ऑर्डरों पर संकट मंडरा रहा है।
जेब से घाटा भर रहे कारोबारी

लखनऊ चिकनकारी हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल के अनुसार, डाई का खर्च 100 से बढ़कर 150 रुपये प्रति पीस हो गया है, क्योंकि कुछ रंगरेज दोगुने दाम पर सिलिंडर खरीद रहे हैं। वहीं, ग्राहकों से पहले ही पुराने रेट पर बिलिंग हो चुकी है, ऐसे में बढ़ी हुई लागत का 50 रुपये प्रति पीस का घाटा हो रहा है, क्योंकि बिलिंग के बाद रेट नहीं बढ़ा सकते। अभी 4-5 दिन हालात सामान्य होने का इंतजार है। अगर हालात नहीं सुधरे तो ग्राहकों को अपनी जेब से पैसा खर्च कर किसी तरह ऑर्डर पूरे कराएंगे।
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ईद मनाने का संकट
लाटूश रोड के नया गांव स्थित लॉन्ड्री संचालक आसिफ ने बताया कि गैस न मिलने से काम पूरी तरह सिमट गया है। भट्ठी जलाकर जैसे-तैसे काम चलाने की कोशिश हो रही है, लेकिन वह बड़े ऑर्डरों के लिए नाकाफी है। कमाई बंद होने से इन परिवारों के सामने ईद मनाने का संकट खड़ा हो गया है।

कपड़ों की डाई ठप।

कपड़ों की डाई ठप।

कपड़ों की डाई ठप।

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