नतीजों के बाद गठबंधन के नेताओं ने बैठक कर किया मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। एक्जिट पोल के नतीजों से सपा खेमे में मायूसी थी। लेकिन मंगलवार को हुई मतगणना के बाद उदासी भाजपा के खेमे में छा गई और सपा खेमा उत्साहित दिखा।
श्रावस्ती लोकसभा सीट पर सभी एक्जिट पोल भाजपा की जीत का दावा कर रहे थे। पिछले लोकसभा चुनाव में जीत के बाद पूरे पांच साल जनता से दूर रहने के कारण सपा समर्थकों में कोई खासा उत्साह नहीं था। समर्थकों में जोश भरने के लिए सोमवार को पार्टी प्रत्याशी ने गठबंधन के पदाधिकारियों के साथ कार्यकर्ताओं संग बैठक की। इसके बावजूद पार्टी कार्यालय भिनगा में दोपहर तक सन्नाटा रहा। दो-चार कार्यकर्ता ही फोन पर चुनावी हाल लेते दिखे। जबकि पहले से भाजपा की जीत पक्की मान कर चल रहे भाजपाइयों ने पार्टी कार्यालय सहित प्रत्याशी के कार्यालय में टेंट व कुर्सी का इंतजाम किया था। लेकिन चक्रवार आ रहे रुझानों के बाद जहां सपा कार्यालय में समर्थकों की भीड़ बढ़ती रही। वहीं भाजपा कार्यालय की स्थिति यह थी कि दोपहर बाद वहां कुर्सी खाली हो गई। 20वें चरण की मतगणना के बाद जहां भाजपा खेमे में मायूसी दिखी। वहीं सपा व कांग्रेस समर्थकों ने न सिर्फ जम कर खुशियां मनाया।
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कांटे की नहीं एकतरफा जीती सपा
श्रावस्ती लोकसभा सीट पर पहले लोग यह अनुमान लगा रहे थे कि यहां सपा व भाजपा में कांटे की टक्कर होगी। लेकिन ऐसा हो न सका। इस सीट पर शुरुआती रुझान से ही लगातार जीत की तरफ अग्रसर सपा प्रत्याशी राम शिरोमणि वर्मा ने एकतरफा जीत हासिल की।
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भाजपा की हार ने सबको चौंकाया
भाजपा ने इस सीट पर साकेत मिश्र को मैदान में उतार कर न सिर्फ इसे हॉट सीट बना दिया। बल्कि हाई प्रोफाइल इस सीट पर जीत दर्ज कराने के लिए भाजपा ने एड़ी चोटी का जोर भी लगाया। प्रधानमंत्री की जनसभा के बाद लोग यह मानकर चल रहे थे कि भाजपा यहां रिकार्ड मतों से न सिर्फ जीत दर्ज करेगी। बल्कि केंद्र में सरकार बनने पर साकेत मिश्र मंत्री बनने के साथ जिले का चहुंमुखी विकास भी करेंगे। लेकिन उनकी हार ने न सिर्फ सबको चौका दिया। बल्कि प्रधानमंत्री की जनसभा के बाद भी मिली इस हार ने चुनावी पंडितों का गुणा गणित बिगाड़ दिया।
प्रथम चरण से लेकर अंतिम चरण तक पिछड़ी भाजपा
श्रावस्ती। श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र के भिनगा व श्रावस्ती विधानसभा सीट के लिए ही जिले में मतगणना कराई गई। इन दोनों ही सीटों पर शुरुआत से लेकर अंत तक सपा ही आगे रही। कुछ चरणों में जरूर भाजपा ने बढ़त हासिल किया। लेकिन वह सपा के शुरुआती बढ़त के कारण लगातार पीछे ही रही।