पंचायत चुनाव को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग डुप्लीकेट वोटरों पर नजर रख रहा है। ऐसे लोग वोट नहीं दे पाएंगे जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की ग्राम पंचायतों में सबसे अधिक डुप्लीकेट वोटर मिले हैं। इनके नाम ग्राम पंचायतों में दो-दो जगह दर्ज हैं।
यहां 8.48 फीसदी डुप्लीकेट मतदाता मिले हैं। यह खुलासा डी-डुप्लीकेट सॉफ्टवेयर के कारण हो सका है। पूरे प्रदेश की बात करें तो कुल 3.73 प्रतिशत वोटर डुप्लीकेट मिले हैं।
पहली बार राज्य निर्वाचन आयोग ने ब्लॉक के मतदाताओं में डुप्लीकेट मतदाता छांटने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है। आयोग ने यह सॉफ्टवेयर माइक्रोसॉफ्ट से बनवाया है। इसमें चार सूचनाओं नाम, पिता का नाम, उम्र व जेंडर का मिलान किया जा रहा है।
जिस भी मतदाता की ये चारों सूचनाएं मिल जाती हैं, उन्हें डुप्लीकेट वोटर मानते हुए अलग रख लिया जाता है। इसके बाद बीएलओ से इनकी जांच कराई जा रही है।
सूबे में कुल 821 ब्लॉक में 41,06,532 डुप्लीकेट वोटर मिले हैं। यह कुल मतदाताओं का 3.73 प्रतिशत है। अगर जिलों को देखा जाए तो वाराणसी में 8.48 प्रतिशत डुप्लीकेट वोटर पाए गए हैं।