केजीएमयू में हड़ताल से ट्रॉमा सेंटर पर बढ़ा भार
लखनऊ। केजीएमयू में हड़ताल का सबसे अधिक असर ट्रॉमा सेंटर पर पड़ा। ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीज हड़ताल की वजह से सीधे ट्रॉमा पहुंचना शुरू हो गए थे। इससे कैजुअल्टी फुल हो गई। स्ट्रेचर तक अंदर जाने की जगह नहीं बची। ऐसे में गार्डों ने मरीजों को कैजुअल्टी के बाहर ही कतार में खड़ा करा दिया। मरीज घंटों तक इलाज के इंतजार में तड़पते रहे।
ट्रॉमा की कैजुअल्टी में 24 घंटे में करीब 250 मरीज आते हैं।
हालांकि, मंगलवार सुबह 11 बजते ही यह आंकड़ा पार कर गया। जूनियर डॉक्टरों ने सिर्फ अति गंभीर मरीजों को अंदर बुलाया। सामान्य को कैजुल्टी-न्यूरोलॉजी इमरजेंसी के बाहर ही रोक दिया गया। तीमारदार विश्वनाथ ने बताया कि सुबह 9 बजे मरीज को कैजुअल्टी में ले जा रहे थे, पर डॉक्टरों ने बाहर ही रोक दिया। दो घंटे बाद भी कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया। दोपहर बाद ओपीडी शुरू हुई तो कुछ राहत मिली।
लॉरी की इमरजेंसी ने बढ़ाई मुसीबत
केजीएमयू प्रशासन मंगलवार को भी लॉरी के इमरजेंसी संचालन पर ठोस रणनीति तय नहीं कर पाया। ऐसे में कैजुअल्टी में छह बेड पर इमरजेंसी सेवा चल रही थी। दिल के रोगियों को लॉरी से कैजुअल्टी भेजा जा रहा था। इस कारण दूसरे मरीजों को बाहर रोका जा रहा था। पुराने सीएमओ भी कैजुअल्टी से गायब रहे। जूनियर डॉक्टर ही इलाज करते रहे।