फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘तोड़-फोड़-जोड़’ में फुस्स हुआ यूपी

Tue, 18 Feb 2014 09:57 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला,लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
तैयारी थी आम तो आम, गुठलियों से भी दाम वसूलने की। योजना थी मैसूर की तरह यहां भी ताजे फलों को सात दिन से बढ़ाकर 35 दिन तक ताजा रखने की।
विज्ञापन


कर्नाटक की तरह सूबे के तकनीकी संस्थानों में विद्यार्थियों को ‘तोड़-फोड़-जोड़’ में मास्टर बनाने की। ऐसी ही तमाम प्राथमिकताएं तय हुई थीं।

मगर हालात ये हैं कि सूबे में इन सारे कामों पर नजर रखने वाली स्टेट इनोवेशन काउंसिल की हर दो माह पर होने वाली बैठक कई-कई महीने तक नहीं हो पा रही हैं।

हालांकि, सूबे के इनोवेशन आइडिया की तारीफ जरूर हो रही है। प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर कारगर साबित रहे नव प्रयोगों (इनोवेशन) के बेहतर इस्तेमाल और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने।

अनुकूल माहौल बनाने, इनोवेशन करने वालों को पुरस्कृत करने जैसे मकसद के साथ करीब तीन साल पहले मार्च 2011 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय इनोवेशन काउंसिल का गठन हुआ था।
विज्ञापन


कमेटी गठन के करीब दस माह बाद जनवरी 2012 में पहली बैठक की याद तब आई जब दिल्ली में प्रधानमंत्री के सलाहकार सैम पित्रोदा ने इनोवेशन के रोडमैप पर चर्चा के लिए बैठक की।

इसमें तय हुआ था कि हर दो माह पर काउंसिल की बैठक होगी। मगर पित्रोदा की बैठक के बाद इनोवेशन की बातें कागजों में ही रह गईं।

इस काउंसिल को अपनी दूसरी बैठक के लिए करीब डेढ़ साल का इंतजार करना पड़ा। इसकी अंतिम बैठक पिछले साल 24 जुलाई को हुई।

एक तरह से इनोवेशन को लेकर यह अहम बैठक थी। इनोवेशन से जुड़े कई एक्सपर्ट व शासन के अफसर इसमें शामिल हुए। कई नीतिगत निर्णय लिए गए।

इनोवेशन की प्राथमिकता के क्षेत्र तय हुए। उन पर कार्यवाही की विभागवार जिम्मेदारी तय की गई। करीब छह माह बीतने को हैं पर इस कमेटी की दो माह पर होने वाली बैठक नहीं हो पाई है।
विज्ञापन


इनोवेशन के क्या हाल होंगे? मगर केंद्र सरकार ने पिछले महीने हैदराबाद में इनोवेशन पर देश भर की इनोवेशन काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी जिसमें यूपी के आइडिया की तारीफ हुई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें