‘कोई भी बीमारी हो, इसके सबसे ज्यादा मरीज हमारे देश में मिलेंगे। चाहे यह डायबिटीज हो या फिर हॉर्ट प्रोब्लम या कैंसर। सच यह है कि हमारा देश आज बीमारियों की वैश्विक राजधानी बन चुका है।’
सोमवार को सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) के 63वें वार्षिक समारोह में भारत सरकार के सचिव, बायोटेक्नोलॉजी विभाग प्रो. के विजय राघवन ने यह हकीकत वैज्ञानिकों के सामने रखी।
प्रो. राघवन सीएसआईआर-सीडीआरआई केजानकीपुरम विस्तार स्थित परिसर में 39वें सर एडवर्ड मेलनबाई मेमोरियल ओरेशन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हम कई बीमारियों के पैमाने पर बुरी स्थिति में पहुंच चुके हैं।
वैश्विक राजधानी बन चुके भारत में लाइफस्टाइल, ट्रॉपिकल, कम्युनिकेबल बीमारियों के आंकड़े बताते हैं कि इनके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ कार्डियोलॉजी की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2020 में 40 प्रतिशत मौत हार्ट डिसीज की वजह से होंगीं।
1990 में में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत था। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट दुनिया के एक चौथाई मरीज अकेले भारत में होने का दावा करती है।
आने वाले कुछ ही साल में यह दो गुनी हो जाएगी। यही आंकड़े भारत को बीमारियों की वैश्विक राजधानी बना देते हैं।
इस समस्या का समाधान सुझाते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले बीमार होने की वजह और दर को कम करना होगा। सरकार अपने स्तर पर तमाम प्रयास कर रही है। पॉलिसी बनाई जा रही हैं।
फ्रेक्चर जोड़ने का नया फार्मूला
हड्डी केफ्रेक्चर को अब कई गुना तेजी से ठीक किया जा सकेगा। विश्व में पहली दफा वैज्ञानिकों ने एक ड्रग कम्पाउंड की खोज की है।
इस कम्पाउंड का असर मौजूदा दवाओं से ज्यादा तेजी से होगा। इसकी खोज सीएसआईआर-सीडीआरआई ने मुंबई की एक कंपनी की मदद से की है। यह विश्व में अपने तरह का इकलौता ड्रग कम्पाउंड है। इस ड्रग को ओरल तरीके से भी लिया जा सकता है।
इस कम्पाउंड को सीडीआर914/के058 नाम दिया गया है। अभी इसे हमने रेपिड फ्रेक्चर हीलिंग ओरल ड्रग नाम दिया गया है।