दुधवा नेशनल पार्क का नया सेशन 15 नवंबर से शुरू हो रहा है। इस बार कई ऐसे हाईलाइट्स हैं जिनसे टूरिस्ट को एक नया एक्सपीरिएंस मिलेगा। इस साल की थीम बायोडायवर्सिटी रखी गई है।
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इसका मकसद है कि टूरिस्ट बाघ देखने के अलावा पार्क के दूसरे नजारों का भी मजा लें। दुधवा पार्क एडमिनिस्ट्रेशन ने फैसला लिया है कि इस सेशन से थारु की ट्राइबल आर्ट का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
इंडियन के साथ फॉरेन टूरिस्ट को अट्रैक्ट करने के लिए इस बार कई खास चीजें हैं। रुकने के लिए थारु हट, गेस्ट हाउस और डोरमेट्री की व्यवस्था है। टूरिस्ट गाड़ियों को अंदर नहीं ले जा सकेंगे।
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थारु हट को ट्राइबल थीम में सजाया गया है और कुछ हट में एसी भी होंगे। गेस्ट हाउस में इंडियन टूरिस्ट का प्रति व्यक्ति किराया 1000 रुपये है। वहीं डोरमेट्री में एक रात रुकने का किराया 75 रुपये है।
सेशन से पहले शुरू हुआ सेलिब्रेशन
दुधवा नेशनल पार्क का सेशन शनिवार से शुरु हो रहा है, लेकिन वहां एक दिन पहले ही सेलिब्रेशन शुरू हो चुका है।
14 नवंबर नेशनल पार्क के लिए खास दिन है। दरअसल एक साल पहले इसी दिन पार्क की दो हथनियों चमेली और श्रीलोचना ने बच्चों को जन्म दिया था।
इस बार चमेली का बच्चा विनायक और श्रीलोचना की सुहेली एक साल के हो गए हैं। पार्क एडमिनिस्ट्रेशन इन दोनों बच्चों को शुभ मानता है और इनके जन्मदिन पर सब बहुत एक्साइटेड हैं। डबल्यू डबल्यू एफ के कोऑर्डिनेटर मुजिद गुप्ता की बेटी ने शुक्रवार को शाकाहारी केक कटवाकर विनायक और सुहेली का जन्मदिन मनाया।
विजिट में आने वाले खर्चे का एक आइडिया एंट्री फीस- 100 रुपये, बच्चों की 50 रुपये
गाड़ी खड़ी करने की फीस- 800 रुपये मिनी बस, 300 रुपये कार, 1600 रुपये बड़ी बस।
रुकने के लिए- गेस्ट हाउस 1000 रुपये, नॉन एसी थारु हट-450 रुपये, डॉरमेट्री-75 (प्रति व्यक्ति एक रात का किराया)
हाथी की सवारी- 150 रुपये प्रति व्यक्ति। एक हाथी पर चार लोग बैठ सकते हैं।
मिनी बस- 50 रुपये प्रति व्यक्ति, जिप्सी- 40 रुपये प्रति व्यक्ति।
गाइड-200 रुपये (इस बार महिला गाइड्स की भी तैनाती की गई है।) कुल 35 गाइड हैं जिनमें 7 महिला गाइड्स होंगी।
खाने के लिए कैंटीन है। कैमरा और वीडियो कैमरा ले जाने के लिए अलग से फीस देनी होगी। इस हिसाब से एंट्री फी 100 रुपये, डॉरमेट्री में रुकने का 75 रुपये और जिप्सी का किराया 40 रुपये जोड़ें तो आप 215 रुपये में इस नेशनल पार्क में सैर का मजा ले सकते हैं।
बहराइच का कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र भी पर्यटकों के लिए 15 नवंबर से खोल दिया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने पूरी तैयारियां कर ली हैं।
हालांकि, सूखी पड़ी गेरुआ नदी से पर्यटकों को निराशा जरूर होगी। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में बाघ, तेंदुए, हिरन, हाथी, चीतल, बारहसिंघा व अन्य दुर्लभ वन्यजीव विहार करते हैं।
लेकिन, बरसात के मौसम में जंगल की पगडंडियां क्षतिग्रस्त होने और वन्यजीवों के हमले की आशंका बढ़ने के मद्देनजर पर्यटकों के आगमन पर रोक लगा दी जाती है।
इस बार कतर्नियाघाट पहुंचने वाले पर्यटक मोतीपुर और ककरहा रेंज में इको टूरिज्म के रूप में विकसित विश्राम भवन के अलावा वातानुकूलित थारूहट, 16 बेड के डबल स्टोरी डॉरमेट्री, कैंटीन, का भी लाभ ले सकेंगे।
प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि इको टूरिज्म के लिए नए सिरे से निर्मित भवनों के अलावा ककरहा, मोतीपुर, निशानगाड़ा, धर्मापुर, मुर्तिहा और कतर्नियाघाट गेस्ट हाउस में भी पर्यटक ठहर सकेंगे।
कतर्नियाघाट के दो थारूहट पर्यटकों के लिए बुक किए जाएंगे। डीएफओ ने कहा कि कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटक अपने साथ रेडियो, रिवॉल्वर, बंदूक आदि नहीं ला सकेंगे। जंगल में तेज आवाज करना प्रतिबंधित है।