प्रदेश के 26 जिले गंभीर सूखे का सामना कर रहे हैं। ये जिले ऐसे हैं जहां 50 प्रतिशत से कम बरसात हुई है। इनमें से 12 जिले तो ऐसे हैं जहां 40 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई। लगातार प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे किसानों के लिए नई मुसीबत चुनौतीपूर्ण है।
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इसी साल फरवरी से अप्रैल तक किसानों ने बेमौसम बारिश व ओलों का कहर झेला। राहत के नाम पर केंद्र से राज्य तक खूब सियासत हुई और दो तिहाई जिले के किसानों को पर्याप्त राहत नहीं पहुंची। कई जिलों में अब भी राहत वितरण का काम चल रहा है। इस विपदा से किसान उबरे भी नहीं कि सूखे ने दस्तक दे दी। किसानों ने पिछले साल भी सूखे का कहर झेला था।
प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चंद्रा ने जिलों में सामान्य से कम बारिश की सूचना के बाद कई बिंदुओं पर तत्काल सूचना मांगी है। उनसे कई ऐसे सवाल किए गए हैं जिनसे यह पता चल सकेगा कि जिले सूखे की चुनौती से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। इसके बाद सरकार गंभीर स्थिति का सामना कर रहे जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की कार्यवाही कर सकती है।
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वर्षा की स्थिति
12 जिले--सामान्य
24 जिले--सामान्य से कम (60 से 80 प्रतिशत)
27 जिले--अत्यधिक कम बरसात (40 से 60 प्रतिशत)
12 जिले--अत्यल्प (40 प्रतिशत से भी कम)
ये सूचनाएं मांगीं - मंडल व जिला मुख्यालय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कितने घंटे बिजली सप्लाई - कितने ट्रांसफार्मर खराब - कितने नलकूपों के लिए बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की जरूरत
- कुल टेलों की संख्या और उनका ब्यौरा जहां पानी नहीं पहुंचा - जिले में पंप कैनाल की संख्या और इससे सिंचाई की स्थिति - नलकूपों के साथ स्थायी रूप से, 15 दिन से कम और 15 दिन से अधिक खराब हैंडपंपों की संख्या
- पेयजल व सिंचाई वाले सरकारी नलकूपों की स्थिति - रिबोर कराए जाने वाले हैंडपंप व रिबोर क राए गए हैंडपंप - पेयजल समस्या से ग्रस्त, महामारी प्रभावित, पशुरोग प्रभावित और चारे की कमी वाले गांवों, नगरों व नगर पालिकाओं व नगर निगमों की संख्या
-जिले में तालाब व कुएं में पेयजल उपलब्धता - खरीफ फसल बुआई का ब्यौरा, लक्ष्य, बोया गया क्षेत्रफल, 50 प्रतिशत से अधिक प्रभावित फसल।