उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक या गैर व्यावसायिक वाहन का पंजीयन नंबर अब एक हफ्ते में मिल जाएगा। जनहित गारंटी में शामिल परिवहन विभाग की सेवाओं के तहत कार्यों को सात दिन में पूरा करने की बाध्यता तय की गई है। इनमें देरी होने पर अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी विभिन्न सेवाओं के लिए लखनऊ व गाजियाबाद में टोकन व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई है। आवेदक कार्यालय में उपस्थित होकर टोकन काउंटर से टोकन प्राप्त कर अपने नंबर के अनुसार काउंटर पर उपस्थित होकर कार्य कराते हैं। इससे आवेदक को लाइन नहीं लगानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये परिवहन विभाग की सेवाओं की समीक्षा करते हुए सभी जिलाधिकारियों तथा परिवहन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए।
परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने बताया कि जनहित गारंटी अधिनियम के तहत विभाग की 24 सेवाएं शामिल की गईं हैं। नई व्यवस्था में डीलरों पर अब यह बाध्यता नहीं रह गई है कि वे वाहनों के पंजीयन के लिए मूल दस्तावेज आरटीओ ऑफिस पहुंचाएं, बल्कि वाहनों के दस्तावेज डिजिटल हस्ताक्षर सहित सभी प्रपत्रों के साथ ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।