शासन ने केंद्रीय पेयजल योजनाओं में सेंटेज का भुगतान करने से पहले इसकी गहन जांच कराने का निर्णय लिया है। कार्यदायी संस्था जल निगम ने पिछले वित्त वर्ष के लिए 63 करोड़ रुपये सेंटेज के तौर पर मांगे हैं। इसमें गड़बड़ी की आशंका के चलते योजनाओं के लिए भुगतान करने से पहले 16 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की जांच या परीक्षण आम तौर पर नहीं होता था। शासन के विशेष सचिव पंकज सक्सेना की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति अनुभाग के तहत केंद्र पोषित पेयजल योजनाओं यानी राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम और नीर निर्मल परियोजना के लिए सेंटेज का भुगतान किया जाना है। इन कार्यों को कराने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश जल निगम को दी गई है। इनमें बने सेंटेज के परीक्षण और निर्धारण के लिए जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षण की जिम्मेदारी वन एवं वन्य जीव विभाग के वित्त नियंत्रक आलोक अग्रवाल को दी गई है।