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कांग्रेस सरकार में भी अटल बिहारी के कहने पर पुराने लखनऊ में डाली गई थी सीवर लाइन

Mon, 13 Nov 2017 02:13 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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अटल बिहारी बाजपेयी
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अटल बिहारी वाजपेयी के राजधानी से सांसद होने के बाद उनकी लखनऊ के विकास की चिंता और सक्रियता के बारे में तो सभी जानते हैं। पर, बहुत कम लोगों को पता होगा कि शहर के विकास को लेकर वह तब भी चिंतित रहा करते थे जब वे लखनऊ से सांसद नहीं चुने गए थे। उस समय भी उन्हें लखनऊ के सरोकारों का बहुत ख्याल रहा करता था।
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उनके कहने पर ही 80 के दशक में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजधानी को साफ और स्वच्छ बनाने की योजना शुरू की थी।  पुराने लखनऊ में सीवर लाइन पड़ना शुरू हुई थी। तिवारी सरकार में नगर विकास मंत्री रहे नरेश चंद्रा जो कुछ बताते हैं, उससे यही पता चलता है।

अटल बोले, पुराना नहीं संवारोगे तो नया नहीं संवरेगा

पुराने लोग बताते हैं कि 1985 में राजधानी में बाढ़ आई थी। अटल बिहारी वाजपेयी लोकसभा का चुनाव हार चुके थे। हालांकि वह तब उत्तर प्रदेश से नहीं लड़े थे। बावजूद इसके वह भी बाढ़ की विभीषिका देखने लखनऊ आए। उन्होंने ठाकुरगंज से लेकर पुराने लखनऊ के कई इलाकों का पैदल दौरा किया। देखा जगह-जगह गंदगी  है। शौचालयों की गंदगी बाढ़ के पानी के साथ बह रही है।
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तिवारी सरकार में नगर विकास मंत्री रहे नरेश चंद्रा बताते हैं कि एक दिन कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात हुई। मैंने उन्हें प्रणाम किया। वे बोले, ‘नरेश जी, आप लखनऊ के हैं। संयोग से आपको नगरों के विकास की जिम्मेदारी भी मिल गई है। पुराने लखनऊ में बहुत गंदगी है। कई जगह सुबह-सुबह नालियों में मल बहता दिखता है। यह लखनऊ की पहचान पर दाग है। कुछ करो। बिना पुराने लखनऊ को संवारे नया लखनऊ भी नहीं संवरेगा।’

बकौल नरेश चंद्रा ‘अटल जी ने राजधानी में पीने के पानी की समस्या पर भी बात की और कहा कि लोगों को समस्या नहीं होनी चाहिए।’ चंद्रा बताते हैं कि उन्होंने दोनों ही मुद्दों पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से बातचीत की। तिवारी जी ने भी कहा, ‘अटल जी जैसे व्यक्ति ने अगर कुछ कहा है तो उस पर तत्परता से काम की जरूरत है।’ पर, पुराने लखनऊ के रास्ते बहुत पतले थे। इंजीनियरों ने मुश्किलें बतानी शुरू कर दीं। कहा कि सीवर डलवाने में बड़ी दिक्कत आएगी। सीवर डलवाने के बाद सड़क बनवाने में भी समस्या आएगी क्योंकि रोलर नहीं चल पाएगा।

जापानी टीम के सहयोग से शुरू हुआ काम

नरेश चंद्रा - फोटो : amar ujala
नरेश चंद्रा बताते हैं, ‘इसी बीच जापान में नगरीय विकास पर दुनिया के कई देशों के नगर विकास मंत्रियों के सम्मेलन का बुलावा मुझे मिला। उसमें देश के छह राज्यों के नगर विकास मंत्रियों को बुलाया गया था। वहां पर बातचीत हुई। जापान ने एक टीम भेजने का आश्वासन दिया और अन्य सहायता का भी वादा किया।

एक टीम आई और उसने दौरा किया। फिर पूरी कार्ययोजना बनी और पुराने लखनऊ में सीवर लाइन डालने का काम शुरू हुआ। मुख्य मार्गों पर छोटी-छोटी सीवर लाइनों को बदला गया और उन्हें जोड़कर टैंकों की गहराई बढ़ाकर व्यवस्था ठीक की गई। नई तकनीक से संकरी गलियों के रास्ते खड़ंजे से पक्की सड़कों में बदले गए।’

अटल जी जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली तो राजधानी के सीवर और गंदे पानी के निस्तारण के लिए जापान से बातचीत करके वहां की संस्था ‘जायका’ के सहयोग से कार्ययोजना बनवाई। इस कार्ययोजना में राजधानी की सीवर पुनर्गठन एवं ट्रंक-सीवर सफाई का काम भी शामिल था। इसके लिए उन्होंने ‘जायका’ से वित्तीय पोषण की भी व्यवस्था कराई।

पेयजल समस्या के समाधान में आड़े आया अफसर

नरेश चंद्रा बताते हैं कि उन्होंने जब लखनऊ की पेयजल की समस्या के समाधान पर काम शुरू किया तो पता चला कि जल संस्थान के तत्कालीन एक वरिष्ठ अधिकारी जो पारसी समुदाय से ताल्लुक रखते थे कि मनमानी से यह समस्या विकराल हो रही है। पैसा होेने के बावजूद वह टैंक नहीं बनने दे रहे हैं। परेशानी बताने वालों के साथ उनका व्यवहार भी ठीक नहीं है।

नगर निगम के तत्कालीन प्रशासक ने भी बताया कि ऊंची राजनीतिक पहुंच रखने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती। चंद्रा के मुताबिक, ‘मैने उन्हें हटाने को कहा तो ऊपर से फोन आने लगे। नाम तो बताना उचित नहीं है लेकिन मेरी कांग्रेस पार्टी के भी तमाम बड़े नेताओं ने मुझे फोन करके मौन रहने को कहा।’ मैं बहुत तनाव में आ गया।

कुछ बड़े नेताओं ने यह भी कहा कि अधिकारी का ताल्लुक पारसी समुदाय से है। उन पर कार्रवाई से कॉंग्रेस के अल्पसंख्यक विरोधी होने का संदेश जाएगा। इसका काफी राजनीतिक नुकसान होगा। कुछ तत्कालीन केंद्रीय मंत्रियों ने भी कार्रवाई करने से रोका। एक तरफ राजनीतिक दबाव तो दूसरी तरफ लखनऊ के नागरिकों की समस्या। आखिरकार दिमाग में एक योजना आई कि कागजों में अगर अधिकारी की सारी कारस्तानी ले आई जाए तो कार्रवाई हो सकती है। अधिकारी के खिलाफ आई शिकायतों की जांच करवाई।
 
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अधिकारी हटा तो मिला लखनऊ को पानी

जांच शुरू हुई तो उनके भ्रष्टाचार से लेकर अन्य तमाम ऐसे तथ्य सामने आने लगे जिन पर कार्रवाई हो सकती थी। एक दिन मैंने बिना किसी को बताए तत्कालीन प्रमुख सचिव को बुलाकर अधिकारी को हटाकर वहां दूसरे की तैनाती का निर्देश दे दिया। पर, यह क्या? मैं कुंभ मेला की व्यवस्थाओं के लिए इलाहाबाद पहुंचा तो देखा कि वह अधिकारी कुंभ मेला की जिम्मेदारी संभाल रहा है।

मैंने वहां के तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी और मंडलायुक्त से कहा कि उनकी जगह किसी और को कुंभ मेला की जिम्मेदारी दीजिए, नहीं तो दुनिया भर में बदनामी होगी। इनके हटने के बाद ही मैं इलाहाबाद से लौटकर लखनऊ जाऊंगा। तब जाकर वहां दूसरे की तैनाती हुई।’ अधिकारी पर जांच बैठा दी। इसके बाद उनके तेवर ढीले हुए और लखनऊ में अतिरिक्त टैंकों का निर्माण कराकर पानी की आपूर्ति दुरुस्त की गई।
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