अटल बिहारी वाजपेयी के राजधानी से सांसद होने के बाद उनकी लखनऊ के विकास की चिंता और सक्रियता के बारे में तो सभी जानते हैं। पर, बहुत कम लोगों को पता होगा कि शहर के विकास को लेकर वह तब भी चिंतित रहा करते थे जब वे लखनऊ से सांसद नहीं चुने गए थे। उस समय भी उन्हें लखनऊ के सरोकारों का बहुत ख्याल रहा करता था।
उनके कहने पर ही 80 के दशक में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजधानी को साफ और स्वच्छ बनाने की योजना शुरू की थी। पुराने लखनऊ में सीवर लाइन पड़ना शुरू हुई थी। तिवारी सरकार में नगर विकास मंत्री रहे नरेश चंद्रा जो कुछ बताते हैं, उससे यही पता चलता है।
अटल बोले, पुराना नहीं संवारोगे तो नया नहीं संवरेगा
पुराने लोग बताते हैं कि 1985 में राजधानी में बाढ़ आई थी। अटल बिहारी वाजपेयी लोकसभा का चुनाव हार चुके थे। हालांकि वह तब उत्तर प्रदेश से नहीं लड़े थे। बावजूद इसके वह भी बाढ़ की विभीषिका देखने लखनऊ आए। उन्होंने ठाकुरगंज से लेकर पुराने लखनऊ के कई इलाकों का पैदल दौरा किया। देखा जगह-जगह गंदगी है। शौचालयों की गंदगी बाढ़ के पानी के साथ बह रही है।
तिवारी सरकार में नगर विकास मंत्री रहे नरेश चंद्रा बताते हैं कि एक दिन कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात हुई। मैंने उन्हें प्रणाम किया। वे बोले, ‘नरेश जी, आप लखनऊ के हैं। संयोग से आपको नगरों के विकास की जिम्मेदारी भी मिल गई है। पुराने लखनऊ में बहुत गंदगी है। कई जगह सुबह-सुबह नालियों में मल बहता दिखता है। यह लखनऊ की पहचान पर दाग है। कुछ करो। बिना पुराने लखनऊ को संवारे नया लखनऊ भी नहीं संवरेगा।’
बकौल नरेश चंद्रा ‘अटल जी ने राजधानी में पीने के पानी की समस्या पर भी बात की और कहा कि लोगों को समस्या नहीं होनी चाहिए।’ चंद्रा बताते हैं कि उन्होंने दोनों ही मुद्दों पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से बातचीत की। तिवारी जी ने भी कहा, ‘अटल जी जैसे व्यक्ति ने अगर कुछ कहा है तो उस पर तत्परता से काम की जरूरत है।’ पर, पुराने लखनऊ के रास्ते बहुत पतले थे। इंजीनियरों ने मुश्किलें बतानी शुरू कर दीं। कहा कि सीवर डलवाने में बड़ी दिक्कत आएगी। सीवर डलवाने के बाद सड़क बनवाने में भी समस्या आएगी क्योंकि रोलर नहीं चल पाएगा।