डॉ. आरपी सिंह
लखनऊ। जापान में भारतीय महिला हॉकी टीम के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतते ही भारतीय हॉकी टीम चयन समिति के चेयरमैन और पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी डॉ. आरपी सिंह भावुक हो उठे। गोमती नगर स्थित आवास पर मैच देख रहे डॉ. सिंह ने कहा कि एक पल को ऐसा लगा, जैसे जागती आंखों से अपना सपना सच होते देख रहे हों। 44 साल का इंतजार खत्म होने पर उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। जापान से भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों और हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों ने फोन कर उन्हें बधाई दी।
डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि जब उन्हें भारतीय हॉकी टीम चयन समिति के चेयरमैन की जिम्मेदारी मिली थी, तभी उन्होंने भारतीय हॉकी के स्वर्णिम युग की वापसी का सपना देखा था। चैंपियन टीम के गठन के लिए प्रत्येक खिलाड़ी के प्रदर्शन, क्षमता और खेल की जरूरतों का बारीकी से आकलन किया गया। दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता को भी चयन का अहम आधार बनाया गया।
उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास के साथ प्रैक्टिस मैच और विदेशी टीमों के खिलाफ खेलने के अवसर दिए गए। आधुनिक हॉकी बेहद तेज हो गई है और छोटी-सी गलती भी गोल में बदल सकती है। ऐसे में प्रत्येक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जाती है। कोच के साथ बैठक कर कमियों और उनमें सुधार पर चर्चा की जाती है। डॉ. सिंह ने कहा कि अब टीम के सभी 11 खिलाड़ियों को डिफेंस और अटैक, दोनों में सक्षम होना होगा।
इस ऐतिहासिक जीत की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। अब इस प्रदर्शन को निरंतर बनाए रखना और ओलंपिक में पदक जीतने की दिशा में आगे बढ़ना अगला लक्ष्य होना चाहिए।