टीयर्स संस्था विशेष बच्चों को वोकेशनल कोर्स के साथ डोरमेट, दरी, ज्वैलरी बनाने आदि का प्रशिक्षण दे रही है। खेलों में भी इन्हें पारंगत किया जा रहा है। इसके एवज में कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। संस्था के वाहन बच्चाें को घर से लाने और वापस छोड़ने का काम भी मुफ्त में करते हैं। संस्था के काम देखकर लोग मदद को आगे आते हैं।
डॉ. रीता बताती हैं कि जब 10 विशेष बच्चों के साथ संस्था शुरू की तो ससुराल में सिर्फ पति का साथ मिला था। हालांकि, जब संस्था ने इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना शुरू किया तो सभी ने सराहा। अब संस्था 250 बच्चों को इस लायक बना रही है कि वे रोजमर्रा के काम खुद कर सकें। इसमें 50 से अधिक कर्मचारी सहयोग करते हैं।