लखनऊ। लखीमपुर खीरी की आशा कार्यकर्ता की इलाज के दौरान मौत मामले में डॉक्टर के बयान दर्ज न होने पर उन्हें दोषी करार देकर जांच कमेटी रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को भेजेगी। कमेटी ने मानवाधिकार आयोग से हफ्ते भर का समय लिया है। उसका कहना है कि मानवाधिकार व पुलिस दोनों को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की संस्तुति होगी।
लखीमपुर खीरी के महाराज नगर निवासी सुरेंद्र की पत्नी आशा कार्यकर्ता पूनम मौर्य (32) की नौ नवंबर को शताब्दी अस्पताल फेज टू में मौत हो गई थी। पूनम इलाज के लिए केजीएमयू के ईएनटी विभाग आई थीं, मगर केजीएमयू से बर्खास्त डॉ. रमेश ने उन्हें खदरा के केडी अस्पताल में भर्ती करा दिया था, जहां बेहोशी का इंजेक्शन देते ही उनकी हालत बिगड़ गई थी। इस पर उन्हें शताब्दी अस्पताल में भर्ती में कराया गया था, जहां नौ नवंबर को उनकी मौत हो गई थी।
इसके बाद पति सुरेंद्र ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। वहां से 23 मार्च तक रिपोर्ट तलब की गई थी। कमेटी के पास डॉ. रमेश ने अभी तक बयान दर्ज नहीं कराया। इससे जांच पूरी नहीं हो सकी है। जांच कमेटी ने मानवाधिकार आयोग से हफ्ते भर का समय लेकर जांच रिपोर्ट भेजने की बात कही है। कमेटी का कहना है डॉक्टर के बयान दर्ज न होने पर उसे दोषी करार देकर रिपोर्ट मानवाधिकार व पुलिस को भेजी जाएगी।