सूत्रों का कहना है कि यह रकम रमीज को धर्मांतरण गिरोह की ओर से भेजी गई थी। पुलिस अब आरोपी और उसके परिजनों की संपत्ति का ब्योरा जुटा रही है। माना जा रहा है कि रमीज के जरिये धर्मांतरण कराने वाले लोगों को पैसे भिजवाए जाते थे। आरोपी के आतंकी संगठनों से कनेक्शन सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि रमीज ने कितनी बार जम्मू कश्मीर की यात्रा की है। आरोपी के नेपाल कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं। केजीएमयू से भागने के बाद रमीज 16 दिन तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया। इतने दिनों में वह कितने लोगों के संपर्क में रहा और किन लोगों से मदद ली, इसकी दिशा में भी छानबीन की जा रही है।
फंड जुटाने की आशंका
बताया जा रहा है कि पुलिस से छिपकर रहने के दौरान आरोपी ने विभिन्न संगठनों से फंड भी जुटाए थे। वह पूर्वांचल में अपने करीबियों के ठिकाने पर ठहरा था। पुलिस बहराइच और बलरामपुर में छांगुर बाबा के करीबियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को संरक्षण देने वालों के बारे में पता लगाया जा रहा है। ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने रमीज को मदद पहुंचाई है।
गवाह और काजी को नहीं पकड़ सकी पुलिस
धर्मांतरण का दबाव बनाने के आरोपी काजी और गवाह को चौक पुलिस अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। काफी समय बीतने के बाद भी दोनों की गिरफ्तारी नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोपियों के पकड़े जाने के बाद ही गिरोह का पर्दाफाश हो सकेगा। बावजूद इसके पुलिस दोनों को गिरफ्तार करने में नाकाम है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही दोनों को पकड़ लिया जाएगा।