ग्रीस से आए होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. कोस्टास सिटेंडस ने बताया कि होम्योपैथी के जरिए कैंसर की बीमारी का निदान किया जा सकता है। बशर्ते लक्षण का आकलन सही तरीके से किया जाए। वह राजधानी लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कंवेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी कांफ्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि कैंसर की दूसरी और तीसरी स्टेज में भी होम्योपैथिक दवा कारगर साबित हुई है। डॉ. गिरीश गुप्ता ने महिलाओं में गर्भाशय में होने वाली गांठ पर होम्योपैथी दवा के असर की चर्चा की। केस स्टडी देते हुए बताया कि दवा शुरू करने से पहले और दवा शुरू करने के बाद संबंधित मरीज में किस तरह का प्रभाव पड़ा। डॉ रवि सिंह द्वारा होम्योपैथी की सर्जरी की बीमारियों में उपयोगिता पर अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए।
इसी तरह डॉ प्रवीण कुमार, डॉ पंकज श्रीवास्तव, डा. एके गुप्ता ने मोटर न्यूरॉन डिजीज के रोगियों पर अपने विचार रखें। हैनीमैन एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के सचिव डॉक्टर आशीष वर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में देश-विदेश से लगभग 650 चिकित्सा शिक्षक छात्र-छात्राओं ने भाग ले रहे हैं। समिति के अध्यक्ष डॉ शिवली मजहर ने बताया कार्यक्रम में होम्योपैथी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 30 चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।
दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए लखनऊ हाईकोर्ट के न्यायाधीश मंजीत शुक्ला ने होम्योपैथी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा, अंगद कुमार सिंह, अवनीश कुमार सिंह ने भी होम्योपैथी को हर व्यक्ति तक पहुंचाने की बात कही। डॉ आनंद चतुर्वेदी, डॉ रामजी सिंह, होम्योपैथिक निदेशक डॉ प्रमोद कुमार सिंह आदि ने प्रदेश में होम्योपैथी को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान स्मारिका का भी विमोचन किया गया।