दहेज प्रताड़न के आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
लखनऊ। दहेज के लिए विवाहिता को प्रताड़ित करने और उसे गायब करने के आरोपी पति संतोष कुमार, माधुरी, हनोमान यादव और शीला को साक्ष्य के अभाव में एडीजे देवेश चंद्र गुप्ता ने बरी कर दिया। कोर्ट ने झूठी गवाही देने पर मामले के वादी व विवाहिता के पिता केशव राम के खिलाफ वाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से बताया गया कि वादी की बेटी शीला का विवाह 17 जून 2011 को हुआ था। ससुराल के लोग दो लाख रुपये दहेज की मांग कर बेटी को प्रताड़ित करते थे। दहेज न मिलने पर हत्या की धमकी देते थे। 26 नवंबर 2013 को संतोष ने फोन कर पूछा कि क्या शीला घर आई है या कहीं भाग गई है। जब वादी बेटी की ससुराल गया तो संतोष भाग गया था। अन्य रिश्तेदारों ने शीला के विषय में संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। प्राथमिकी दर्ज कराकर आशंका जताई थी कि ससुराल वालों ने शीला की हत्या कर शव गायब कर दिया है। हालांकि, मामले में शीला का कुछ पता नहीं चला था।