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लिवर किया दान, बड़े भाई की बचाई जान

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लखनऊ। राजाजीपुरम निवासी दयाराम ने बड़े भाई की जान बचाने के लिए मंगलवार को लिवर दान किया। केजीएमयू में हुए इस सातवें प्रत्यारोपण के बाद डोनर व मरीज दोनों की स्थिति सामान्य है। प्रत्यारोपण सुबह छह से दोपहर चार बजे तक चला।
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विकासदीप भवन में रजिस्ट्रार दफ्तर में कार्यरत चुन्नी लाल (53) को अक्तूबर 2017 से दिक्कत थी। जुलाई में जांच कराई तो पता चला कि उन्हें लिवर सिरोसिस हो गया है। गंभीर अवस्था में उन्हें केजीएमयू में भर्ती किया गया। गैस्ट्रो सर्जरी विभाग ने प्रत्यारोपण की जरूरत बताई। अंग प्रत्यारोपण के लिए कोआर्डिनेटर पीयूष श्रीवास्तव, क्षितिज वर्मा, नंद गोपाल, अश्विनी कुमार सिंह ने परिवारीजनों की काउंसलिंग की। बताया कि लिवर दान करने से दानकर्ता को कोई दिक्कत नहीं होती है। लिवर का लोब लिया जाता है, जो तीन माह में फिर तैयार हो जाता है। इस पर परिवारीजन राजी हो गए।
केजीएमयू की टीम ने चुन्नी लाल के बेटे, बेटी व भाई दयाराम (46) की जांच की। इस दौरान दयाराम की जांच रिपोर्ट मरीज से मिलान कर गई। इसके बाद प्रत्यारोपण किया गया। चुन्नीलाल के बेटे मोहित ने बताया कि उनकी मां कुसुमलता, बहनें और वह खुद लिवर दान करने को तैयार थे, लेकिन डॉक्टरों ने उनके चाचा दयाराम के लिवर को प्रत्यारोपण के लिए फिट माना। दयाराम निजी स्कूल में कार्यरत हैं।
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प्रत्यारोपण करने वाली टीम
लिवर प्रत्यारोपण करने वाली टीम में गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा के साथ डॉ. विवेक गुप्ता, प्रदीप जोशी, गैस्टोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रुंगटा, एनेस्थिसिया के डॉ. अनीता मलिक, डॉ. मो. परवेज, डॉ. एहसान सिद्दिकी, ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉॅ. शीतल वर्मा, डॉ. वाहिद, मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमाशुं, रेस्पेरेटरी के डॉ. दर्शन बजाज, कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ गौरव चौधरी थे। मैक्स हॉस्पिटल की टीम में डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. राजेश डे, डॉ. शालीन अग्रवाल, डॉ वैभव नासा आदि थे। इस दौरान सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार और एमएस प्रो. बीके ओझा भी मौजूद रहे।
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