लखनऊ। तबस्सुम और प्रशांत श्रमिकों और निर्धन वर्ग के लोगों को उनके दस्तावेज के बदले 30 से 50 हजार रुपये तक देते थे। दस्तावेज तैयार होने पर अम्मार से कारोबारी आईटीसी खरीदने के लिए संपर्क करते थे।
डीसीपी कमलेश दीक्षित ने बताया कि इसी तरह एसएस गैलेक्सी और एसएस एंटरप्राइजेज फर्म के मालिक सुमित सौरभ ने अम्मार से संपर्क किया था। प्रशांत ने सुमित की कंपनी के लिए फर्जी इनवाॅइस तैयार की थी। इसी के जरिये सुमित ने 19 लाख की कर चोरी की थी। इसके बदले प्रशांत को दो चेक, एक लाख रुपये और एक लाख रुपये दौलतराम के नाम पर बनाई गई फर्म स्वराज ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। ऑनलाइन आईटीसी जनरेट करने पर प्रशांत को अलग से कर चोरी की रकम का प्रतिशत कमीशन मिलता था।
सीए के भी नाम आए सामने
डीसीपी के मुताबिक गिरोह के तार पूरे देश में फैले हैं। तफ्तीश में कुछ सीए के भी नाम सामने आए हैं। उनका भी पता लगाया जा रहा है। मास्टरमाइंड अम्मार जीएसटी के एक और फर्जीवाड़े में सीतापुर जेल जा चुका है। उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है। फर्जीवाड़े में शामिल तबस्सुम हाईस्कूल फेल है।
लखीमपुर, सीतापुर, हरदोई में भी कर चुके हैं फर्जीवाड़ा
गिरोह के लोग लखीमपुर, सीतापुर और हरदोई में भी फर्जीवाड़ा कर चुके हैं। आरोपियों के पास 20 डेबिट कार्ड, 26 सिम कार्ड, 11 मोबाइल, पांच मेमोरी कार्ड, एक लैपटॉप, 25 आधार कार्ड की फोटोकॉपी, 25 पैन कार्ड की फोटोकॉपी, पांच चेकबुक, तीन पासबुक, तीन हस्ताक्षरित चेक, नौ कैशबुक, 137 फर्जी इनवॉइस, खतौनी, निवास प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।