जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से हालात लगातार बिगड़ गए हैं। मंगलवार को हड़ताल में कई और जिलों के डॉक्टरों के शामिल हो जाने से स्थिति भयावह हो गई है।
सोमवार को मुख्यमंत्री की डॉक्टरों से हड़ताल खत्म कर काम पर वापस आने की अपील का भी कोई असर नहीं पड़ा है।
इस बीच, इलाज के अभाव में मंगलवार को लखनऊ में 4, कानपुर में 7, आगरा और मेरठ में दो-दो मरीजों की मौत हो गई।
बीते चार दिनों में 55 लोग दम तोड़ चुके हैं। वहीं, आगरा मेडिकल कॉलेज के भी 200 जूनियर डॉक्टरों ने कानपुर की घटना के विरोध में इस्तीफा दे दिया है।
कानपुर में 28 फरवरी को सपा विधायक इरफान सोलंकी व जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट के बाद पुलिसिया कार्रवाई से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने चिकित्सा सेवाएं ठप कर रखी हैं।
इस मामले में 24 जूनियर डॉक्टरों को जेल भेजे जाने से गुस्साए प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए।
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, आगरा, इटावा, इलाहाबाद, मेरठ, वाराणसी, अलीगढ़, गाजियाबाद सहित कई और जिलों में पड़ रहा है।
सिर्फ अपील कर रही सरकार
हड़ताल रोकने के लिए सरकार पिछले चार दिनों से कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। सिर्फ अपील कर रही है कि डॉक्टर हड़ताल वापस ले लें।
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने मंगलवार को कहा कि जो लोग बगैर इलाज के मर रहे हैं उसके लिए दोषी कौन है? यह मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है।
वहीं प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा बीएस भुल्लर ने कहा कि इस घटना में आम जनता का कसूर नहीं है फिर उन्हें क्यों पीड़ित किया जा रहा है।
और डॉक्टरों ने की मांग
उधर, हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों की मांग है कि मारपीट करने वाले सपा विधायक इरफान सिंह सोलंकी पर कार्रवाई और कानपुर एसएसपी यशस्वी यादव को हटाया जाए।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा था कि वीडियो फुटेज देखकर कार्रवाई हो। लेकिन, अभी तक किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया गया है।