प्रोफेसर दिव्य नारायण के अनुसार, सीटी स्कैन से पता चला कि खपरैल का टुकड़ा ऑप्टिकल नर्व के पास तक पहुंच गया था। बायीं आंख खराब हो गई थी, लेकिन दायीं आंख से एक मिलीमीटर दूर था। डर था कि निकालते वक्त जरा सी असावधानी दूसरी आंख को भी खराब कर सकती है।
दूसरा खतरा यह था कि ब्रेन फ्लोर से जुड़ी नसें भी डैमेज हो सकती थीं। लेकिन हर स्तर पर सावधानी बरतते हुए खपरैल को निकालने में कामयाबी मिली। बच्चा अब पूरी तरह से ठीक है।
ये रही डॉक्टरों की टीम
प्लास्टिक सर्जरी विभाग से डॉ. डीएन उपाध्याय, डॉ. अभिजात, डॉ. संदेश, डॉ. आकांश, न्यूरो सर्जरी से डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव, डॉ. नवनीत, ऑप्थमॉलजी से डॉ. अपजित कौर, डॉ. शैलजा, एनेस्थीसिया से डॉ. सतीश वर्मा।