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Lucknow News: गर्भवतियों की जिंदगी को खतरे में डाल रही डॉक्टरों की लापरवाही

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प्रतीकात्मक।
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लखनऊ। केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (क्वीन मेरी) में रेफर होकर आने वाली 70 फीसदी गर्भवती महिलाओं को मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा। इससे रास्ते में ही उनकी स्थिति गंभीर और जानलेवा हो जा रही है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रो. रेखा सचान ने बताया कि जिलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होने वाली 70 फीसदी गर्भवती महिलाओं को बिना मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन के ही भेजा जा रहा है। क्वीन मेरी में प्रतिदिन लगभग छह से सात हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली गर्भवती महिलाएं भर्ती होती हैं। इनमें गंभीर उच्च रक्तचाप और प्री-एक्लेम्पसिया जैसी स्थितियां देखने को मिलती हैं। दो से तीन गर्भवती महिलाओं को दौरे पड़ रहे होते हैं। समय पर मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन न लगना इसकी मुख्य वजह है। रेफर करने से ठीक पहले इंजेक्शन लगाने से स्थिति नियंत्रित रहती है।
मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन की आवश्यकता
मैग्नीशियम सल्फेट जीवन रक्षक दवा है। यह गर्भवती महिला को दौरे पड़ने से रोकती है। रेफर करने से पहले लोडिंग डोज देने पर एंबुलेंस के सफर के दौरान मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों की जान सुरक्षित रहती है। यह ब्रेन हैमरेज, ऑर्गन फेलियर या गर्भ में बच्चे की मौत का खतरा कम करता है। यह शिशु तक ब्लड फ्लो बनाए रखने में मदद करता है। यह दौरों को रोकता है और नर्वस सिस्टम को शांत करता है।
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बिना इंजेक्शन के गंभीर खतरे
बिना मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन के जच्चा-बच्चा दोनों को खतरा होता है। इसमें हाई ब्लड प्रेशर, दिमाग की नस फटने या ब्रेन हैमरेज का खतरा बढ़ जाता है। दौरे पड़ने और एंबुलेंस में झटके आने से मां और बच्चे दोनों की तुरंत मौत का जोखिम रहता है। गर्भ में ऑक्सीजन की कमी से शिशु की मौत का खतरा भी बना रहता है।
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