लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में संविदा पर कार्यरत डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। डॉक्टरों से प्राइवेट प्रैक्टिस न करने के लिए शपथ पत्र लिया जा रहा है। इससे उनमें आक्रोश व्याप्त है। डॉक्टरों का कहना है कि एनपीए का लाभ न लेने वाले डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस से रोका नहीं जा सकता है। रोक लगने पर सामूहिक रूप से डॉक्टर इस्तीफा देने को मजबूर होंगे।
सरकारी अस्पतालों में एनएचएम के तहत लखनऊ में 80 से अधिक डॉक्टर तैनात हैं। इसमें बलरामपुर 30, लोकबंधु 22, सिविल 18 समेत अन्य अस्पतालों में संविदा पर डॉक्टर तैनात हैं। इन डॉक्टरों को एक लाख रुपये वेतन मिलता है।
डॉक्टरों का कहना है कि संविदा पर कार्यरत चिकित्सकों को नॉन प्रैक्टिस एलाउंस नहीं मिलता है। ऐसे में उन्हें प्राइवेट प्रैक्टिस करने के लिए रोका नहीं जा सकता है। एनएचएम की गाइडलाइन में भी संविदा डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक नहीं है।
डीएम ने सभी अस्पतालों में कार्यरत स्थायी और अस्थायी डॉक्टरों से शपथ पत्र मांगा है। संविदा पर कार्यरत डॉक्टर इस आदेश को लेकर विरोध में उतर आए हैं। डॉक्टरों का कहना है प्राइवेट प्रैक्टिस से रोका गया तो वह इस्तीफा दे देंगे।