लखनऊ। केजीएमयू में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की मुहिम को कुछ डॉक्टर कमीशनखोरी के कारण विफल कर रहे हैं। डॉक्टर निजी मेडिकल स्टोर के एजेंटों से साठगांठ कर मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बाद भी यह खेल जारी है, जिससे गरीब मरीजों का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सोमवार को केजीएमयू प्रशासन की पहल पर पुलिस ने आर्थोपेडिक्स विभाग के सामने निजी मेडिकल स्टोर के कुछ एजेंटों को पकड़ा था। इससे पहले लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के सामने भी ऐसे दलालों पर शिकंजा कसा गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि मरीजों को मिलने वाले हर परचे पर लिखी दवा की खरीद पर डॉक्टरों को 25 से 30 फीसदी तक कमीशन मिलता है। डॉक्टर चुनिंदा कंपनियों की दवाएं लिखते हैं, जो गिने-चुने मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने मरीजों से संस्थान के एचआरएफ स्टोर से ही दवाएं खरीदने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इन स्टोरों पर दवाएं बाजार मूल्य से 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर उपलब्ध हैं।